23 साल का गबरू जवान उत्तराखंड
– अशोक त्रिपाठी।
आज से लगभग 23 साल पहले उत्तर प्रदेश से पर्वतीय क्षेत्र को अलग करके उत्तरांचल राज्य बनाया गया था। उसी का नाम बाद में उत्तराखंड कर दिया गया। अलग राज्य बनाते समय बहुत उम्मीदें जतायी गयी थीं जो सभी पूर्ण नहीं हो पायीं लेकिन राज्य के विकास में काफी प्रयास भी किया गया है। तीन दशक पहले जो लोग बाबा केदारनाथ, माता पूर्णागिरी की यात्रा पर गये होंगे, उनको दुरूह पथों की याद जरूर आती होगी लेकिन अब इन सभी तीर्थस्थलों पर पहुंचना काफी सुलभ हो गया है। इसका बहुत ज्यादा श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी दिया जा सकता है। बाबा केदारनाथ धाम में समाधि लगा चुके पीएम मोदी ने राज्य में आलवेदर रोड बनाने की प्रेरणा दी थी। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम तक यातायात को सुगम बनाया गया है। पीएम मोदी कहते हैं कि 21वीं सदी के विकसित भारत के निर्माण के दो प्रमुख स्तंभ हैं। पहला, अपनी विरासत पर गर्व और दूसरा विकास के लिए हर संभव प्रयास। उत्तराखंड इन दोनों ही स्तंभों को लगातार मजबूत कर रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक कहा है। इसलिए हम पीएम के विजन के अनुरूप उत्तराखंड को हर क्षेत्र में आदर्श राज्य बनाने के लिए विकल्प रहित संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। इस 9 नवम्बर को राज्य के स्थापना दिवस पर कुछ प्रमुख घटनाओं का उल्लेख समीचीन होगा। राज्य मंे पहली सरकार भी भाजपा ने ही बनायी थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहला कार्यभार तब संभाला था जब राज्य में विधानसभा के चुनाव होने थे। इस प्रकार उनको कार्य करने का अवसर लगभग डेढ़ साल ही मिल पाया। इस दौरान केदारनाथ-बदरीनाथ धाम में 1300 करोड़ रुपये के पुनर्निर्माण कार्य सम्पन्न हुए हैं। इसी का नतीजा है कि चारधाम यात्रा के दौरान रिकार्ड 55 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किये हैं। इतने अधिक श्रद्धालुओं के आने से वहां स्थानीय निवासियों को भी रोजगार मिला। पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आने का मुख्य कारण ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन और टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन भी रही है। रेल के साथ ही रोड कनेक्टिविटी ने भी श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोत्तरी की है। चारधाम आलवेदर रोड, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड योजना, गौरीकुंड-केदारनाथ रोप वे कनेक्टिविटी, गोविन्दधार-हेमकुंड और सुरकंडा देवी रोपवे ने पर्यटकों को आकर्षित किया है। राज्य में 4000 से अधिक होम स्टे विकसित किये गये हैं। इस प्रकार राज्य से युवाओं का पलायन भी रुका है जो इस पर्वतीय क्षेत्र की सबसे गंभीर समस्या मानी जाती थी। राज्य में अब उद्योग-धंधे भी लग रहे हैं, ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2023 के लिए ही अब तक 1.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू हो चुके हैं। इन पर कार्यान्वयन भी शीघ्र होने की उम्मीद है।
इस बार उत्तराखंड का 24वां स्थापना दिवस मनाया गया। 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था। उत्तराखंड को अस्तित्व में आए हुए 23 साल पूरे हो गए हैं। उत्तराखंड के 23वें राज्य स्थापना दिवस पर देहरादून पुलिस लाइन में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, सीएम धामी और राज्यपाल गुरमीत सिंह भी मौजूद रहे।
कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के 27वें राज्य के रूप में राज्य बना था। सन 2000 से 2006 तक यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में एक वर्ष में कई ऐतिहासिक कार्य हुए हैं और राज्य ने विकास के नये आयाम छुए हैं। प्रदेश के मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चैहान ने बताया कि इस अवधि में भाजपा सरकार के खाते में कई उपलब्धियां दर्ज हुईं। कई निर्णय दूसरे राज्यों के लिए भी नजीर बने। नकल विरोधी सख्त कानून देश में पहली बार उत्तराखंड में आया है और इससे युवा और पूरा जनमानस खुश है। यहां तक कि दूसरे राज्य भी इस कानून को लेकर उत्साहित हैं और अपने राज्य मे लागू कर सकते हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ भाजपा के जीरो टॉलरेंस की नीति का भी पूरी पारदर्शिता के साथ अनुपालन किया गया है। कठोर धर्मांतरण कानून हो या समान नागरिक आचार संहिता का कानून लाने मे उनकी बेहतर पहल है। भर्ती घोटालों से निपटने में पारदर्शी नीति के तहत नकल माफिया को सलाखों के पीछे पहुंचाया तो जोशीमठ आपदा से निपटने के प्रयास में मुख्यमंत्री ने सूझबूझ से कार्य कर खुद को साबित किया है। आज बेहतर पुनर्वास नीति का लाभ प्रभावितों को मिल रहा है। महिला क्षैतिज आरक्षण और आंदोलनकारियों को आरक्षण बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन जिसमें उन्होंने आगामी दशक को उत्तराखंड का कहा है, धामी सरकार तेजी से उस ओर बढ़ रही है। मुख्यमंत्री धामी वर्ष 2025 तक उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के विजन पर कार्य कर रहे हैं।
पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामले में उत्तराखंड देश का सबसे अग्रणी राज्य है। राज्य में कुल चुने गए पंचायत प्रतिनिधियों में महिलाओं की संख्या 56 फीसदी है, जो देश के किसी भी राज्य से ज्यादा है। यह खुलासा केंद्रीय सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन के राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय की हाल ही जारी भारत में महिलाएं और पुरुष 2022 रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट में आंकड़ों के जरिये महिलाओं की स्थिति के बारे में राज्यवार तस्वीर बयान की गई है। राज्य के 13 जिलों में 7791 ग्राम पंचायतों में 62796 पदों पर 35177 महिलाएं जनप्रतिनिधि हैं। यह कुल पदों का 56 फीसदी है। पुरुषों की तुलना में महिला जनप्रतिनिधियों का ऐसा अनुपात किसी भी राज्य में नहीं हैं।
पुष्कर सिंह धामी सरकार ने ‘एक जिला दो उत्पाद’ योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य राज्य के सभी 13 जिलों के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाना है। अल्मोड़ा जिले की अगर बात करें, तो इस योजना के तहत यहां से बाल मिठाई और ट्वीड के कपड़े को चुना गया है, जिससे स्थानीय मिठाई विक्रेता और कपड़े आदि के कारोबार से जुड़े उद्यमी काफी उत्साहित हैं। यहां की बाल मिठाई देश-विदेश में मशहूर है। सरकार की इस पहल से आने वाले समय में सभी जिलों के प्रसिद्ध उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा जिससे युवाओं को उनके जिले में ही रोजगार मिलेगा और पलायन की समस्या भी कुछ हद तक कम हो सकेगी। (हिफी)

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