जी-20 समिट 2023: भारत पर भरोसा
जी-20 दुनिया के 20 बड़े देशों का एक ऐसा समूह है जो वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ एक संगठन के रूप में काम करता है। जब सभी 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष चर्चा करने के लिए एक निश्चित समय और तय स्थान पर इकट्ठा होते हैं तो इसे समिट कहा जाता है। इसे एक खास तरह की महापंचायत भी कह सकते हैं।
महेन्द्र बोरा
ग्रुप ऑफ ट्वेंटी (संक्षिप्त में जी-20) विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नर्स का एक संगठन है, जिसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं। लेकिन वर्तमान में इसकी अहमियत इतनी बढ़ चुकी है कि अब इसमें राष्ट्राध्यक्ष भाग लेने लगे हैं। जी-20 को सबसे बड़ा वैश्विक संगठन माना जाता है। साल 2007 में पूरी दुनिया में छायी आर्थिक मंदी के बाद जी-20 फोरम को राष्ट्रप्रमुखों के स्तर का बना दिया गया।
जी-20 शिखर सम्मेलन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यवसाय, निवेश और जलवायु परिवर्तन, गरीबी, असमानता, आतंकवाद आदि अनेक जरूरी मुद्दों पर चर्चा करना है। दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में जी-20 देशों की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत है। दुनिया का कुल 80 प्रतिशत उत्पादन इन्हीं देशों में होता है।
जी-20 मूलत: जी-8 देशों का विस्तार है। शुरुआत में यह जी-7 ग्रुप होता था, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, जापान और इटली सदस्य देश थे। साल 1998 में रूस भी इस ग्रुप के साथ जुड़ गया।
वर्ष 2008 में इसका व्यापक विस्तार करते हुए अच्छी अर्थव्यवस्था और प्रभाव वाले कई अन्य देशोें और यूरोपीय संघ को भी इसमें शामिल कर दिया गया। 2017 तक इस समूह के 20 सदस्य हो गये- अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्किये, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका तथा यूरोपीय संघ। यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व यूरोपीय परिषद् के अध्यक्ष और यूरोपीय केंद्रीय बैंक द्वारा किया जाता है। स्पेन स्थायी अतिथि है।
यह दुनिया के 20 बड़े देशों का एक ऐसा समूह है जो वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ एक संगठन के रूप में काम करता है। जब सभी 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष चर्चा करने के लिए एक निश्चित समय और तय स्थान पर इकट्ठा होते हैं तो इसे समिट कहा जाता है। इसे एक खास तरह की महापंचायत भी कह सकते हैं।
इस साल 9 और 10 सितंबर 2023 को भारत की राजधानी नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित किये गये जी-20 समिट में दो बड़े वैश्विक नेता रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल नहीं हुए। जी-20 समिट के लिए दिल्ली के प्रगति मैदान में इंटरनेशनल एग्जिबिशन कम कन्वेंशन सेंटर (आईईसीसी) बनाया गया, जिसे ‘भारत मंडपम’ नाम दिया गया।
इस बार भारत की अध्यक्षता में अफ्रीकन यूनियन को जी-20 की स्थायी सदस्यता प्रदान की गयी। अब वर्ष 2023 से जी-20 सदस्य देशों की संख्या 21 हो गयी है।

जी-20 के कार्य
जी-20 की बैठक में सदस्य देशों के बीच दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने और उनको बढ़ावा देने पर चर्चा होती है। इसमें शिक्षा, असमानता, गरीबी उन्मूलन, रोजगार, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित करने जैसे मुद्दों पर फैसले लिए जाते हैं।
जी-20 अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच है। यह सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मुद्दों पर वैश्विक संरचना और अधिशासन निर्धारित करने तथा उसे मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जी-20 सदस्य देशों के लिए आर्थिक नीतियों पर चर्चा और समन्वय करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
जी-20 की शक्तियां
संयुक्त राष्ट्र की तरह इसके पास कोई विधायी शक्ति नहीं है और न ही इसके सदस्य देशों के बीच उस फैसले को मानने की कोई कानूनी बाध्यता है। इसका कोई मुख्यालय या सचिवालय भी नहीं है। जी-20 के अध्यक्ष का फैसला ट्रोइका से तय किया जाता है। हर सम्मेलन वर्तमान, पिछले और भविष्य के राष्ट्राध्यक्ष के समर्थन से आयोजित किया जाता है। इस बार ट्रोइका में इंडोनेशिया, भारत और ब्राजील थे।
जी-20 और भारत
जी-20 के गठन के 24 साल बाद यह 18वां सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में संपन्न हुआ। इसका पहला सम्मेलन 14-15 नवंबर 2008 को अमेरिका के वाशिंगटन में हुआ। 17वां सम्मेलन इंडोनेशिया में 15-16 नवंबर 2022 को आयोजित किया गया। 18वां सम्मेलन 9-10 सितंबर 2023 को भारत में संपन्न हुआ। अगले साल 2024 में 19वां सम्मेलन ब्राजील में होगा।
जी-20 समिट के लिए दिल्ली के प्रगति मैदान में विशाल और भव्य ‘भारत मंडपम’ बनाया गया। उसे इस कदर सजाया गया कि मेहमान अभिभूत हो गये। साल भर से इसकी तैयारियां चल रही थीं। अलग-अलग राज्यों में साल भर आयोजन करने के बाद दिल्ली में इसका समापन हुआ और अगले साल की मेजबानी ब्राजील के हवाले कर दी गयी। भारत में इस तरह का इतना बड़ा पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इससे हमें वैश्विक स्तर पर सभी देशों के राष्ट्रप्रमुखों के सामने नये उभरते भारत का गौरव दिखाने का मौका मिला।
साल भर चले इस आयोजन के लिए भारत ने कमल के फूल के साथ धरती को अपना लोगो बनाया। यह लोगो तीन रंगों का है जिन्हें हमारे राष्ट्रीय झंडे से लिया गया है। भारत की थीम ‘वसुधैव कुटुंबकम् ‘ है। हमारा घोष वाक्य एक धरती, एक परिवार और एक भविष्य है।
जी-20 में क्या हुआ
नई दिल्ली में संपन्न जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान ‘नई दिल्ली घोषणा-पत्र’ पर सहमति बनी। जी-20 घोषणा-पत्र ‘सतत समावेशी विकास’ पर केंद्रित है। इसमें सतत हरित मार्ग की परिकल्पना की गई है। जी-20 घोषणा-पत्र में सप्लाई चेन, वृहद-वित्तीय स्थिरता, मुद्रास्फीति और विकास पर यूक्रेन संघर्ष का नकारात्मक प्रभाव दिखाया गया है। घोषणा-पत्र में कहा गया है कि हमारे पास बेहतर भविष्य बनाने का अवसर है, ऐसे में ऐसे हालात नहीं बनने चाहिए कि किसी भी देश को गरीबी से लड़ने या धरती के लिए लड़ने में से किसी एक को चुनना पड़े। ‘नई दिल्ली घोषणा-पत्र’ में जी-20 नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की। सभी ने एक सुर में माना कि यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है।
जी-20 नेताओं ने एक सुर में कहा कि वस्तुओं की बढ़ती कीमतें जीवनयापन की लागत पर दबाव डाल रही हैं और उन्होंने कृषि, खाद्य और उर्वरक के क्षेत्र में ”खुले, निष्पक्ष, पूवार्नुमान योग्य और नियम-आधारित” व्यापार को सुविधाजनक बनाने तथा प्रासंगिक डब्ल्यूटीओ नियमों के अनुरूप निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाने की प्रतिबद्धता जताई।
जी-20 की मेजबानी से भारत के रिश्ते दुनिया के अन्य बड़ देशों से काफी मजबूत हुए हैं। इस समिट ने हमें यह सुनहरा अवसर प्रदान किया कि हम अन्य देशों के सम्मुख भारत को निवेश के लिए सबसे आकर्षक देश के रूप में प्रस्तुत कर पाये। ’
भारत मंडपम

जी-20 समिट के लिए दिल्ली के प्रगति मैदान में इंटरनेशनल एग्जिबिशन कम कन्वेंशन सेंटर (आईईसीसी) बनाया गया, जिसे ‘भारत मंडपम’ नाम दिया गया। इसका उद्घाटन 26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। यह देश का सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर है। इसके लिए पीएम मोदी नेइच्छा जाहिर की थी कि यह भारतीय मूल्यों, परंपराओं और संस्कृति से जुड़ी मॉडर्न बिल्डिंग होनी चाहिए। इसका नाम भी ‘भारत मंडपम’ स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ही दिया है। इसकी प्रेरणा उन्हें भगवान बसवेश्वर के ‘अनुभव मंडपम’ से मिली, जिसका अर्थ वाद और संवाद की
लोकतांत्रिक पद्धति है।
‘भारत मंडपम’ के मुख्य आर्किटेक्ट संजय सिंह हैं। इसे दिल्ली की खिड़की के रूप में बनाया गया है। इससे भारत की सांस्कृतिक और विविधता वाली विरासत की झलक देखने को मिलती है। इसका परिसर क्षेत्र लगभग 123 एकड़ है और इसके निर्माण में करीब 2700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस नव विकसित आईईसीसी कॉम्प्लेक्स में कन्वेंशन सेंटर, एग्जिविशन हॉल और एम्फीथिएटर आदि तमाम अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।
यह वास्तुशिल्प के लिहाज से काफी भव्य है। इसे बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों, सम्मेलनों और अन्य प्रतिष्ठित कार्यक्रमों के आयोजन के लिहाज से डिजाइन किया गया है। कन्वेंशन सेंटर भवन का वास्तुशिल्प डिजाइन भारतीय परंपराओं से प्रेरित है। उसमें आधुनिक सुविधाओं एवं आधुनिक जीवन शैली को अपनाने के साथ-साथ अतीत में भारत के आत्मविश्वास एवं दृढ़ विश्वास की झलक भी मिलती है। भवन का आकार शंख जैसा है। कन्वेंशन सेंटर की विभिन्न दीवारें एवं अग्रभाग भारत की पारंपरिक कला एवं संस्कृति के विभिन्न तत्वों को दर्शाते हैं। यहां स्थापित की गई मूर्तियां एवं भित्ति चित्र भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हैं। संगीतमय फव्वारे आकर्षण और रोमांच पैदा करते हैं। तालाब, झील एवं कृत्रिम जलधाराएं सौंदर्य को बढ़ाती हैं।
‘भारत मंडपम’ आत्मनिर्भर भारत एवं तकनीकी उत्कृष्टता का प्रतीक है। साथ ही यह नए भारत के निर्माण की दिशा में उठाया गया एक कदम भी है।
भारत मंडपम के शिल्प बाजार में बनाया गया ट्राइब्स इंडिया पैवेलियन

जनजातीय कार्य मंत्रालय की ट्राइबल को-आॅपरेटिव मार्केटिव डेवलपमेंट फेडेरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड (ट्राइफेड) के ट्राइब्स इंडिया पैवेलियन में पारंपरिक जनजातीय कला, कलाकृतियों, पेंटिंग, मिट्टी के बर्तन, वस्त्र, जैविक प्राकृतिक उत्पादों और कई अन्य चीजों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की।
पिथौरा कला के विख्यात कलाकार पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित श्री परेश राठवा ने गुजरात तथा मध्य प्रदेश की राठवा, भिलाला, नाइक और भील जनजातियों की प्रतिष्ठित समृद्ध और अनुष्ठानिक कला का प्रदर्शन किया।
मध्य प्रदेश की गोंड पेंटिंग और ओडिशा के कारीगरों द्वारा सौरा पेंटिंग भी बेहद लुभावनी लगींं। बौद्ध और भूटिया जनजातियों द्वारा बुने गए लेह-लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों के अंगोरा और पश्मीना शॉल ने भी खूब वाहवाही बटोरी। नागालैंड के कोन्याक जनजातियों के रंगबिरंगे आभूषण भी काफी मनमोहक थे।
धार्मिक और शुभ अवसरों के दौरान पहनी जाने वाली मध्य प्रदेश की समृद्ध महेश्वरी सिल्क की साड़ियां भी सजायी गयी थीं। असम की बोडो जनजातियों द्वारा बेहद कोमलतापूर्वक बनाई गई एरी (मिलेनियम सिल्क) साड़ियां भी प्रदर्शनी की शोभा बढ़ा रही थीं।
पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के जनजातीय कारीगरों द्वारा पिघली हुई धातुओं, मोतियों, रंगीन कांच के टुकड़ों, लकड़ी की गेंदों से बने ढोकरा आभूषण स्वदेशी पहचान को समृद्ध बना रहे थे। राजस्थान के मीणा जनजाति के कारीगरों द्वारा धातु अंबाबारी शिल्प में लावण्य और सुंदरता को बहुत ही खूबसूरती से उकेरा गया था।
आंध्र प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सहित भारत के विभिन्न राज्यों के अराकू वैली कॉफी, शहद, काजू, चावल, मसाले जैसे प्राकृतिक उत्पाद भी ट्राइफेड द्वारा यहां प्रदर्शित किये गये थे।
ट्राइब्स इंडिया पैवेलियन में एक ही छत के नीचे विविधता में एकता और सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि को दर्शा रहे थे।

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