जीवन के लिए आवश्यक है जैव विविधता
जैव विविधता की समरसता को बनाए रखने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी धरती की पर्यावरण संबंधित स्थिति में तालमेल बनाए रखें। जैव विविधता जितनी समृद्ध होगी उतना ही सुव्यवस्थित और संतुलित हमारा पर्यावरण होगा। जैव विविधता मुख्य रूप से अलग-अलग तरह के पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं और पशु-पक्षियों का धरती पर एक साथ अपने अस्तित्व को बनाये रखते हुए जीवन यापन करने को कहते हैं।
डॉ. किरण बाला सिंह
एक संपूर्ण ग्रह में जीवन के विभिन्न रूपों अर्थात जीव-जंतुओं और तमाम वनस्पतियों का पारिस्थितिकी तंत्र जैव विविधता कहलाता है। जैव विविधता जीवन और विविधता के संयोग से निर्मित शब्द है जो आमतौर पर पृथ्वी पर मौजूद जीवन की विविधता और परिवर्तनशीलता को संदर्भित करता है। जैव विविधता किसी जैविक तंत्र के स्वास्थ्य का घोतक है। पृथ्वी पर जीवन आज लाखों विशिष्ट जैविक प्रजातियों के रूप में उपस्थित है। जैव विविधता एक प्राकृतिक संसाधन है जिससे हमारे जीवन की संपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।
जैव विविधता की समरसता को बनाए रखने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी धरती की पर्यावरण संबंधित स्थिति में तालमेल बनाए रखें। जैव विविधता जितनी समृद्ध होगी उतना ही सुव्यवस्थित और संतुलित हमारा पर्यावरण होगा। जैव विविधता मुख्य रूप से अलग-अलग तरह के पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं और पशु-पक्षियों का धरती पर एक साथ अपने अस्तित्व को बनाये रखते हुए जीवन यापन करने को कहते हैं। अलग-अलग जंतु और पेड़-पौधे ही मिलकर मनुष्य की मूलभूत जरूरतें पूरी करने में सहायता करते हैं। जैव विविधता तीन प्रकार की होती है- अनुवांशिक विविधता, प्रजातीय विविधता, पारितंत्र विविधता।
विश्व के 12 चिन्हित मेगा बायोडायवर्सिटी केंद्रों में से भारत भी एक बायोडायवर्सिटी है। जैव विविधता किसी दिए गए पारिस्थितिकी तंत्र, बायोम या एक पूरे ग्रह में जीवन के रूपों की विभिन्नता का परिणाम है। वातावरण को हर एक वनस्पति तथा जीव के रहने के योग्य बनाने में अलग-अलग उद्देश्य हैं, इसलिए अगर हमें अपने वातावरण की शुद्धता को ऊंचे स्तर तक पहुंचाना है तो हमेशा जैव विविधता के संतुलन को बनाए रखने पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा। लोगों को जैव विविधता के प्रति जागरूक कराने के लिए तथा इसका हमारे जीवन में कितना महत्व है यह बताने के लिए अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है। इस दिन जैव विविधता पर चिंतन-मनन किया जाता है। जैव विविधता तीन प्रकार की होती है –
अनुवांशिक विविधता : एक ही प्रजाति के जीवों में होने वाली विविधताओं को अनुवांशिक विविधता कहते हैं।
प्रजातीय विविधता : जिसमें एक ही प्रजाति के जीव एक-दूसरे से काफी समानता रखते हैं उसे प्रजातीय विविधता कहते हैं
पारितंत्र विविधता : जो आवास एवं जैव समुदायों के अंतर को प्रदर्शित करती है उसे परिस्थितिकी विविधता अथवा पारितंत्र विविधता कहते हैं।
क्यों जरूरी है जैव विविधता
प्रजातियों की विविधता जलवायु को नियंत्रित करने में सहायक होती है। इसके अतिरिक्त यह वायुमंडलीय गैस को स्थिर करने में मदद करती है। इसी जैव विविधता के कारण ही यह धरती मानव के रहने योग्य बनी है। पारितंत्र में जितनी विविधता होगी प्रजातियों के प्रतिकूल स्थितियों में रहने की संभावना और उनकी उत्पादकता भी उतनी ही अधिक होगी। जिस पारितंत्र में जितनी प्रकार की प्रजातियां होंगी वह पारितंत्र उतना ही अधिक स्थाई होगा।
भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से अब तक प्रमुखत: बड़े बांधों के निर्माण, अंधाधुंध औद्योगीकरण, सघन खेती, बढ़ती आबादी के लिए आवास व भोजन की आवश्यकता से जैव विविधता का खूब विनाश हुआ है।
जैव विविधता संरक्षण के उपाय
पृथ्वी को बचाने के लिए हमें जैव विविधता को बचाना होगा। इसके लिए सबसे पहले इंसान को जैव विविधता के महत्व को समझना होगा। जैव विविधता संरक्षण के उपाय क्या-क्या हैं उन्हें अमल में लाना होगा, जैसे कि-
सड़कों पर दौड़ते वाहन बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैला रहे हैं जो वातावरण के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। वातावरण की शुद्धता को बचाने के लिए इन वाहनों पर अंकुश लगाना होगा ताकि यह वातावरण को और दूषित ना कर पाएं।
फैक्ट्रियों से निकलता दूषित पानी जीवन को खराब कर रहा है। पानी में रहने वाले जीवों की जान खतरे में नजर आ रही है। इस दूषित पानी का जल्दी से जल्दी उचित प्रबंधन करना होगा ताकि ये और बड़ी आपदा का रूप न ले ले। पानी को दूषित करने वाले लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई कर उन्हें दंड देना होगा। इसके अलावा ध्वनि प्रदूषण पर भी लगाम लगाना होगा।
वनों की कटाई की वजह से जैव विविधता में गिरावट बढ़ती जा रही है इससे न सिर्फ पेड़ों की संख्या घट रही है बल्कि कई जानवरों एवं पक्षियों से उनका आशियाना भी छिनता जा रहा है। वातावरण की दुर्गति को देखते हुए इस पर तुरंत प्रभाव से नियंत्रण करना होगा।
जैव विविधता संरक्षण का महत्व
मानव जीवन में जैव विविधता का बड़ा महत्व है। इस संसार में सभी के जीवन को स्थिर बनाए रखने में जैव विविधता का एक अहम योगदान है। यह पारिस्थितिकीय प्रणाली के संतुलन को बनाए रखती है। विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी तथा वनस्पति एक-दूसरे की जरूरतें पूरी करते हैं और साथ ही वे एक-दूसरे पर निर्भर भी हैं। उदाहरण के तौर पर मनुष्य को ही ले लीजिए। मनुष्य अपनी मूलभूत आवश्यकता जैसे खाने या रहने के लिए पेड़-पौधों, पशु और अन्य तरह की प्रजातियों पर आश्रित है। हमारी जैव विविधता की समृद्धि पृथ्वी को रहने के लिए तथा जीवन यापन के लायक बनाती है दुर्भाग्य से बढ़ता हुआ प्रदूषण हमारे वातावरण पर गलत प्रभाव डाल रहा है। बहुत से पेड़-पौधे तथा जानवर प्रदूषण के दुष्परिणाम के चलते अपना अस्तित्व खो चुके हैं। कई लुप्त होने की कगार पर खड़े हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो सभी प्रजातियों के सर्वनाश का दिन दूर नहीं है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को यह बात समझनी होगी और इसका समाधान खोजने और उस पर अमल करने का हर संभव प्रयास करना होगा।
जैव विविधता को हो रहे नुकसान के लिए तीन कारण सबसे प्रभावी माने जा रहे हैं-
आवास और विखंडन का नुकसान
पौधों और जानवरों के विलुप्त होने के पीछे इसे प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। आवास के नुकसान का सामान्य उदाहरण उष्णकटिबंधीय वर्षावन के साथ-साथ अमेजॉन वर्षा वन में भी देखा जाता है, जो लाखों प्रजातियों का घर है। इन क्षेत्रों में प्रजातियों को विलुप्त होने के खतरे का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि यहां खेतीबाड़ी, मांस वाले मवेशियों को पालने और चारागाह आदि के लिए पेड़ों को काटकर जंगलों को साफ किया जा रहा है।
अति-शोषण: चूंकि मनुष्य भोजन, आश्रय आदि के लिए पूरी तरह से पारिस्थितिक तंत्र पर निर्भर है, इसलिए अपनी आवश्यकताओं को पूरी तरह से पूरा करने के लिए मनुष्य जैव विविधता का दोहन कर रहा है। इस शोषण के कारण कई प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। मछली की विभिन्न प्रजातियों की अंधाधुंध कटाई करने से कई प्रजातियां लुप्तप्राय हो गयी हैं।
विदेशी प्रजातियों का आक्रमण: कई बार एक विशेष परिस्थितिकी तंत्र में बाहर से किसी प्रजाति के प्रवेश करने पर वह वहां की मूल प्रजातियों की विलुप्ति का कारण बन जाती है। ऐसी ही एक प्रजाति है नील पर्च, जिसे पूर्वी अफ्रीका में विक्टोरिया झील में प्रस्तावित किया गया था। वह झील में 200 से अधिक प्रजातियों के विलुप्त होने का कारण बन गयी। अफ्रीकी कैटफिश भी एक विदेशी प्रजाति है क्योंकि यह स्थानीय मछलियों को नुकसान पहुंचाती है।
– लेखिका प्रसिद्ध जीव-विज्ञान एवं पर्यावरणविद् हैं

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