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सौभाग्य की प्राप्ति का पर्व है हरतालिका तीज

सौभाग्य की प्राप्ति का पर्व है हरतालिका तीज

Sep 17, 2024
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पं. आर.एस. द्विवेदी।

हरतालिका तीज व्रत हर साल भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस त्योहार में मां पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। हरतालिका तीज व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-सौभाग्य की कामना के लिए रखती हैं। वहीं कुछ जगहों पर कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर के लिए यह व्रत रखती हैं। इस व्रत को बेहद ही कठिन माना जाता है, क्योंकि ये निर्जला व्रत होता है। इस दिन महिलाएं बिना अन्न-जल ग्रहण किए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए किया था। हरतालिका तीज व्रत करने से महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हरतालिका तीज खासतौर से उत्तर भारत के राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। हरतालिका तीज व्रत हिंदू धर्म में मनाये जाने वाला एक प्रमुख व्रत है।

इस व्रत को हरतालिका तीज इसलिए कहा जाता है, क्योंकि एक कथा के अनुसार माता पार्वती के पिता उनकी इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से उनकी शादी करवाना चाहते थे। तब माता पार्वती की सहेली उन्हें अपने साथ घने जंगल में ले गईं। इस कहानी में ‘हरत’ का मतलब अपहरण और ‘आलिका’ का मतलब सहेली होता है। इस तरह ‘हरतालिका’ शब्द बना है। हरतालिका तीज की पूजा सुबह स्नान करने और अच्छे कपड़े पहनने के बाद की जाती है। सुबह का समय पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन अगर किसी कारणवश सुबह पूजा न हो पाए, तो प्रदोष काल में भी पूजा की जा सकती है। हरतालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाएं सुबह स्नान के बाद नए वस्त्र पहनकर इस व्रत का संकल्प लेकर दिन की शुरुआत कर सकती हैं। इसके बाद महिलाएं अपने हाथों में मेंहदी लगाकर, संपूर्ण सोलह श्रृंगार करें। हरतालिका तीज में श्री गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इसलिए मिट्टी से तीनों की प्रतिमा बनाएं। उसके बाद भगवान गणेश को तिलक करके दूर्वा अर्पित करें।

इसके बाद भगवान शिव को फूल, बेलपत्र और शमी पत्र अर्पित करें और माता पार्वती को श्रृंगार का सामान अर्पित करें। इसके अलावा तीनों देवी-देवताओं को वस्त्र अर्पित करने चाहिए। इसके बाद हरतालिका तीज व्रत की कथा सुने या पढ़ें। भगवान गणेश की आरती करें। अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती उतारने के बाद भोग लगाएं। इसमें परिवार के सभी महिलाएं मिल-जुलकर घर में मीठा पकवान बनाती हैं। वही पकवान गौरी-गणेश तथा भगवान शिव को अर्पित करती हैं। व्रत करने वाली महिलाएं पूजा करने के बाद भोग लगाकर सबको प्रसाद बांटती हैं। रात को चंद्रमा को अघ्र्य देकर व्रत पूरा किया जाता है।

तीज व्रत के पूजन के लिए लोगो में संशय बना रहता है। पूरे साल में तीन बार तीज मनायी जाती है। हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज। इन तीनों तीज में सबसे ज्यादा महत्व हरतालिका तीज व्रत का है। यह त्योहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने सौभाग्य को खुशहाल बनाने के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर संध्या में भगवान शिव और पार्वती का विशेष तौर पर पूजन करती हैं। कई कुंवारी लड़कियां सुयोग्य वर प्राप्त करने के लिए हरतालिका व्रत करती है। धार्मिक मान्यता यह है की इस व्रत को करने से सौभाग्य, पारिवारिक सुख, संतान सुख, चन्द्र दोष का निवारण होता है।

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