Krishi Chaupal

प्रकृति प्रेम का पर्व है हरियाली तीज

प्रकृति प्रेम का पर्व है हरियाली तीज

Jul 25, 2025
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हरियाली तीज नारी शक्ति, वैवाहिक प्रेम, श्रद्धा, प्रकृति और संस्कृति का एक सुंदर संगम है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की उस भावनात्मक गहराई को दशार्ता है जिसमें धर्म, प्रकृति और सामाजिक मेल-जोल साथ-साथ चलते हैं। आज के आधुनिक युग में भी यह त्योहार महिलाओं के जीवन में उल्लास और सकारात्मकता लाता है।

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हरियाली तीज एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत के राज्यों — राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और हरियाणा में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार सावन (श्रावण) मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जब धरती हरियाली से भर जाती है और वर्षा ऋतु अपने पूर्ण यौवन पर होती है। यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु और सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए मनाया जाता है।

  • हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
    हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती की कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने कई जन्मों तक कठिन तपस्या करने के बाद शिव जी को अपने पति रूप में प्राप्त किया था। इसलिए यह दिन शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है और विवाहित महिलाएं पार्वती जी की तरह अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और वैवाहिक प्रेम की कामना करती हैं।
    हरियाली तीज का नाम और उसका महत्व
    – ‘हरियाली’ का अर्थ है हरापन — जो वर्षा ऋतु के दौरान प्रकृति में दिखाई देता है।
    – ‘तीज’ का अर्थ है मासिक त्रितीया तिथि — यानी हर माह आने वाली तीसरी तिथि।
    – हरियाली तीज सावन मास की तृतीया को आती है, इसलिए इसे श्रावणी तीज भी कहा जाता है।
  • हरियाली तीज पर प्रमुख परंपराएं
    व्रत और पूजा: सुहागिन महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। वे दिन भर व्रत रखती हैं और रात्रि में तीज माता (पार्वती जी) की पूजा करके व्रत खोलती हैं।
    सोलह श्रृंगार: महिलाएं इस दिन विशेष रूप से सजती-संवरती हैं। वे हरे वस्त्र पहनती हैं, मेहंदी रचाती हैं, हरी चूड़ियाँ पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं।
    झूला झूलना: हरियाली तीज का एक विशेष आकर्षण झूले होते हैं। महिलाएं गीत गाती हुई पेड़ों पर झूले झूलती हैं, जो इस त्यौहार की पारंपरिक सुंदरता को और बढ़ा देती हैं।
    लोकगीत और नृत्य: महिलाएं लोकगीत गाती हैं और पारंपरिक लोकनृत्य करती हैं।
    तीज माता की कथा: पूजा के समय तीज माता की कथा सुननी आवश्यक मानी जाती है। यह कथा शिव-पार्वती विवाह के प्रसंगों को दशार्ती है।
  • हरियाली तीज के सांस्कृतिक पक्ष
    ’ हरियाली तीज महिलाओं को सजने-संवरने, एक-दूसरे से मिलने-मिलाने, एक साथ आनंद मनाने, स्वादिष्ट पकवान बनाने के साथ-साथ पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर को संवारने और आगे बढ़ाने का अवसर देती है।
  • हरियाली तीज और पर्यावरण
    – हरियाली तीज का संदेश केवल वैवाहिक प्रेम तक सीमित नहीं है, यह प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है। यह त्योहार हमें हरियाली की अहमियत और प्रकृति से जुड़ाव का भी स्मरण कराता है।
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