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पंडित दीन दयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना

पंडित दीन दयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना

Jul 27, 2025
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पंडित दीन दयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना को 2016 में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य कृषि शिक्षा को बढ़ावा देना और जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और गाय आधारित अर्थव्यवस्था जैसी प्रथाओं को बढ़ावा देना है, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरणीय स्थिरता में सुधार करना है। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की शिक्षा शाखा द्वारा लागू किया जाता है।

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  • योजना के उद्देश्य
    0 कुशल मानव संसाधन का निर्माण: ग्राम स्तर पर जैविक खेती और सतत कृषि से संबंधित कुशल मानव संसाधन का निर्माण करना।
    0 तकनीकी सहायता प्रदान करना: ग्रामीण भारत को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सतत कृषि के क्षेत्र में तकनीकी सहायता प्रदान करना।
    0 ग्राम स्तर पर गतिविधियों का विस्तार: स्थापित केंद्रों के माध्यम से योजना की अन्य सहायक गतिविधियों को ग्राम स्तर पर विस्तारित करना।
  • प्रमुख विशेषताएं
    0 केंद्रों की स्थापना: देश भर में 100 केंद्रों की स्थापना की गई है, जिन्हें जैविक और प्राकृतिक खेती से जुड़े ज्ञान, कौशल, क्षमता और अनुभव के आधार पर चयनित किया गया है।
    0 प्रशिक्षण कार्यक्रम: इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और गाय आधारित अर्थव्यवस्था से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
    0 किसानों का चयन: प्रशिक्षण के लिए किसानों का चयन उनकी जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और गाय आधारित अर्थव्यवस्था में रुचि के आधार पर किया जाता है। प्राथमिकता उन किसानों को दी जाती है जो वर्तमान में इन पद्धतियों को अपनाए हुए हैं।
    0 लैंगिक समानता: किसानों के चयन में सभी समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाता है और किसी भी प्रकार का लैंगिक भेदभाव नहीं किया जाता है।
  • कार्यान्वयन
    0 इस योजना का कार्यान्वयन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की शिक्षा शाखा द्वारा किया जाता है। इसके तहत, प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन, किसानों का चयन, प्रशिक्षण सामग्री का विकास और कार्यक्रम की निगरानी जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं।
  • योजना का महत्व
    0 पंडित दीन दयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना के माध्यम से किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती के लाभों के बारे में जागरूक किया जा रहा है, जिससे वे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम करके पर्यावरणीय स्थिरता और मृदा स्वास्थ्य को सुधार सकते हैं। इसके अलावा, गाय आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
  • अधिक जानकारी के लिए, आप भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
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