Krishi Chaupal

सूक्ष्म सिंचाई निधि

सूक्ष्म सिंचाई निधि

Jul 27, 2025
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माइक्रो इरीगेशन फण्ड की स्थापना वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के अंतर्गत की गई। इसे नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) के तहत क्रियान्वित किया गया। इस फंड की प्रारंभिक राशि 5000 करोड़ रुपये रखी गई थी, जिसका उद्देश्य राज्यों को माइक्रो इरीगेशन के विस्तार हेतु किफायती ऋण प्रदान करना है। चूंकि सिंचाई की पारंपरिक विधियां जल की अधिक खपत करती हैं और कई बार किसानों को जल की कमी का सामना भी करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान हेतु माइक्रो इरीगेशन फण्ड (एमआईएफ) की स्थापना की गई है। यह फण्ड किसानों को सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करता है।

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  • योजना का उद्देश्य
    माइक्रो इरीगेशन फण्ड का मुख्य उद्देश्य किसानों को कम जल में अधिक उत्पादन की तकनीक अपनाने में सहायता प्रदान करना है। इसके अन्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:-
    0 जल उपयोग दक्षता में वृद्धि करना।
    0 सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर को प्रोत्साहित करना।
    0 कम पानी वाले क्षेत्रों में फसलों की उत्पादकता बढ़ाना।
    0 किसानों की आय में वृद्धि करना।
    0 प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लक्ष्यों को पूरा करना।
  • योजना की विशेषताएँ
    0 किफायती वित्तीय सहायता: राज्यों को माइक्रो इरीगेशन परियोजनाओं के लिए आसान ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
    0 जल संरक्षण: ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक द्वारा 30% से 50% तक जल की बचत होती है।
    0 उत्पादकता में वृद्धि: पौधों को सीधे जड़ तक जल और पोषक तत्व पहुंचाने से उत्पादन बढ़ता है।
    0 सभी फसलों के लिए उपयुक्त: माइक्रो इरीगेशन तकनीक सभी प्रकार की फसलों के लिए उपयोगी है।
    0 जल प्रदूषण में कमी: कम जल बहाव के कारण भूमि कटाव और जल प्रदूषण में कमी आती है।
  • क्रियान्वयन प्रक्रिया
    0 राज्य सरकारें अपनी परियोजनाओं का प्रस्ताव नाबार्ड को प्रस्तुत करती हैं।
    0 नाबार्ड प्रस्तावों का मूल्यांकन कर फण्ड का आवंटन करती है।
    0 राज्य सरकारें किसानों को माइक्रो इरीगेशन तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
    0 अनुदान और ऋण सहायता के माध्यम से उपकरणों की स्थापना की जाती है।
  • योजना के लाभ
    0 जल की बचत: माइक्रो इरीगेशन तकनीक, जैसे ड्रिप इरीगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम, पानी की अधिकतम बचत सुनिश्चित करती है। पारंपरिक सिंचाई विधियों की तुलना में 30% से 50% तक जल की बचत होती है।
    0 उच्च उत्पादन: फसलों को समय-समय पर आवश्यकतानुसार जल की आपूर्ति होती है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा में वृद्धि होती है। पौधों को पोषक तत्वों की उचित मात्रा मिलती है, जिससे फसल की वृद्धि बेहतर होती है।
    0 ऊर्जा की बचत: माइक्रो इरीगेशन में कम दबाव की आवश्यकता होती है, जिससे ऊर्जा की खपत भी कम होती है। पंप सेट्स और अन्य उपकरणों का उपयोग कम समय के लिए करना पड़ता है।
    0 पोषक तत्वों का बेहतर प्रबंधन: ड्रिप इरीगेशन के माध्यम से उर्वरकों का सीधा पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे उर्वरकों की बबार्दी कम होती है और पौधों को अधिक लाभ मिलता है।
    0 भूमि कटाव में कमी: पारंपरिक बाढ़ सिंचाई की तुलना में माइक्रो इरीगेशन से भूमि का कटाव नहीं होता। मिट्टी का क्षरण कम होता है और खेतों की उर्वरता बनी रहती है।
    0 सिंचाई की लागत में कमी: एक बार माइक्रो इरीगेशन सिस्टम लगाने के बाद, सिंचाई की लागत काफी हद तक कम हो जाती है। पानी और उर्वरक की बबार्दी रुकने से खर्च भी कम होता है।
  • सरकारी सहायता और सब्सिडी
    0 माइक्रो इरीगेशन फण्ड के अंतर्गत केंद्र सरकार और राज्य सरकारें किसानों को सब्सिडी उपलब्ध कराती हैं।
    0 किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम की स्थापना में 50% से 70% तक की सब्सिडी मिलती है।
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