फसल अवशेष प्रबंधन
फसल अवशेष प्रबंधन एक महत्वपूर्ण कृषि तकनीक है, जिसके अंतर्गत फसलों की कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों का सही तरीके से निपटान किया जाता है। भारत में धान और गेहूं की कटाई के बाद बड़े पैमाने पर पराली का उत्पादन होता है। पराली को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और भूमि की उर्वरता घटती है। फसल अवशेष प्रबंधन योजना का मुख्य उद्देश्य इन अवशेषों को जलाने की बजाय उपयोगी तरीकों से निपटान करना है, जिससे प्रदूषण कम हो और कृषि भूमि की उर्वरता बनी रहे। फसल अवशेष प्रबंधन योजना किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हुई है। इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
———————————————————————————————————————-
- शुरूआत और उद्देश्य
0 यह योजना केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 2018 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य पराली जलाने की समस्या का समाधान करना और फसल अवशेषों का उपयोग बायोफ्यूल, खाद, और अन्य उत्पादों के निर्माण में करना है। योजना के तहत किसानों को आधुनिक तकनीकों और मशीनों का उपयोग करने के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है।
- मुख्य विशेषताएँ
0 पराली जलाने पर रोक लगाने के उपाय
0 किसानों को स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्पी सीडर, रीपर कम बाइंडर, और सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण
0 कृषि मशीनों पर 50% से 80% तक की सब्सिडी
0 कृषि अवशेषों का बायोफ्यूल और खाद के रूप में उपयोग
- प्रमुख उपाय और तकनीक
0 इन-सीटू प्रबंधन: फसल अवशेषों को खेत में ही मिट्टी के साथ मिलाकर खाद के रूप में बदलना।
0 एक्स-सीटू प्रबंधन: अवशेषों को खेत से बाहर निकालकर बायोगैस, बायोमास प्लांट और ऊर्जा उत्पादन में प्रयोग करना।
0 हैप्पी सीडर मशीन: इस तकनीक से पराली जलाए बिना सीधे बुआई की जा सकती है।
0 सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम: कंबाइन मशीन से कटाई के समय ही अवशेषों को बारीक काटकर खेत में फैला दिया जाता है।
- योजना का कार्यान्वयन
0 योजना के कार्यान्वयन में केंद्र और राज्य सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, किसान उत्पादक संगठन और स्थानीय पंचायतें भी इसमें भागीदार होती हैं। किसानों को जागरूक करने के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं।
- योजना के लाभ
0 वायु प्रदूषण में कमी
0 मृदा की उर्वरता में वृद्धि
0 ऊर्जा उत्पादन में योगदान
0 किसानों की आय में वृद्धि
- योजना के तहत वित्तीय प्रावधान
0 मशीनों पर 50% से 80% सब्सिडी
0 छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष प्रावधान
0 राज्य सरकारों के माध्यम से अनुदान वितरण
- चुनौतियाँ एवं सुझाव
0 किसानों की जागरूकता की कमी
0 मशीनों की उच्च लागत और उचित निपटान तकनीक का अभाव
0 सस्ती और उपयोगी मशीनों का विकास
0 सामुदायिक मशीन बैंक की स्थापना

Recent Comments