कृषि अवसंरचना कोष योजना
कृषि अवसंरचना कोष (आईएएफ) भारत सरकार द्वारा 2020 में आरंभ की गई एक प्रमुख योजना है। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास, फसल उपरांत प्रबंधन और मूल्य संवर्धन सुविधाओं को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी समितियों, स्टार्टअप्स और एग्री-एंटरप्राइजेज को रियायती ब्याज दरों पर कर्ज उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को न केवल आर्थिक सहायता मिलती है, बल्कि आधुनिक भंडारण, प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं से फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होता है, जिससे भारतीय कृषि को एक नई दिशा मिलती है। कृषि अवसंरचना कोष योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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- योजना के मुख्य बिन्दु
- कब शुरू की गयी : वर्ष 2020-21
- लाभार्थी : देश के सभी पात्र किसान
- खासियत : गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स के निर्माण से स्थानीय स्तर पर गांवों के आसपास रोजगार के अवसर बढ़ाना। किसानों की बिचौलियों पर निर्भरता कम करना।
- मुख्य उद्देश्य
- फसल उपरांत नुकसान में कमी: उचित भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव में फसलों का नुकसान होता है। इस योजना से आधुनिक गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स का निर्माण होगा।
- बाजार मूल्य में वृद्धि: बेहतर भंडारण से फसलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा, जिससे बाजार में उचित मूल्य मिल सकेगा।
- ग्रामीण रोजगार सृजन: स्थानीय स्तर पर गोदाम, प्रोसेसिंग यूनिट्स और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
- कृषि उत्पादन का मूल्य संवर्धन: फसल कटाई के बाद उचित प्रबंधन, ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग से उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- योजना की विशेषताएं
- लक्ष्य राशि: रुपये 1 लाख करोड़
- अवधि: 10 वर्ष (2020-2030)
- ब्याज सबवेंशन: 3% प्रति वर्ष (अधिकतम रुपये 2 करोड़ के कर्ज पर)
- ऋण चुकौती अवधि: अधिकतम 7 वर्ष
- ग्रहणकर्ता: किसान, एफपीओ, सहकारी समितियाँ, स्टार्टअप्स, कृषि उद्यमी
- ऋण गारंटी कवर: सीजीटीएमएसई के माध्यम से
- मार्जिन मनी की आवश्यकता: 10% से 15% तक
- कोलैटरल की आवश्यकता: रुपये 2 करोड़ तक की परियोजनाओं पर कोलैटरल की कोई जरूरत नहीं
- वित्तीय सहायता
- ब्याज में छूट: रुपये 2 करोड़ तक के ऋण पर 3% की ब्याज छूट दी जाती है।
- ऋण गारंटी: क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (सीजीटीएमएसई) के तहत रुपये 2 करोड़ तक के ऋण पर गारंटी कवर उपलब्ध है।
- अनुदान और सब्सिडी: विभिन्न राज्य सरकारें इस योजना के तहत सब्सिडी भी प्रदान करती हैं।
- कौन-कौन पात्र हैं?
- किसान (व्यक्तिगत या किसानों का समूह, कोई भी)
- किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ)
- सहकारी समितियाँ
- स्टार्टअप्स
- कृषि उद्यमी
- स्वयं सहायता समूह (एसएचजी)
- ग्रामीण और शहरी सहकारी बैंक
- योग्य गतिविधियाँ
- गोदाम निर्माण
- कोल्ड स्टोरेज
- साइलो निर्माण
- ग्रेडिंग और सॉर्टिंग यूनिट्स
- प्रोसेसिंग यूनिट्स
- बायो स्टोरेज
- स्मार्ट एग्रीकल्चर फैसिलिटीज
- कृषि मार्केटिंग और लॉजिस्टिक्स
- योजना के लाभ
- कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार: उचित भंडारण और प्रोसेसिंग से उत्पाद लंबे समय तक सुरक्षित और गुणवत्ता युक्त बने रहते हैं।
- किसानों को अधिक मूल्य प्राप्ति: फसल कटाई के तुरंत बाद बेचने की बाध्यता नहीं रहती, जिससे उचित बाजार मूल्य मिल सकता है।
- बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है: किसान सीधे भंडारण और प्रोसेसिंग करके अधिक लाभ कमा सकते हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार: गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स के निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। स्थानीय स्तर पर श्रमिकों की आवश्यकता होती है, जिससे गाँवों में रोजगार मिलता है।
- प्रसंस्करण की सुविधा: किसानों की उपज का प्रसंस्करण होने से उसका मूल्य बढ़ जाता है। गेहूँ से आटा, चावल से ब्राउन राइस, और आलू से चिप्स बनाने जैसी गतिविधियाँ स्थानीय स्तर पर संभव हो जाती हैं। किसान प्रसंस्करण के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।
- फसल उपरांत हानि में कमी: आधुनिक भंडारण सुविधाओं (गोदाम, कोल्ड स्टोरेज) के निर्माण से किसानों की उपज लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। इससे फसल खराब होने और बबार्दी की संभावना कम होती है। किसानों को अपनी उपज को जल्दी बेचने की आवश्यकता नहीं होती, वे बेहतर मूल्य का इंतजार कर सकते हैं।
- बाजार मूल्य में वृद्धि: उचित भंडारण और प्रसंस्करण के कारण फसल का गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है। किसान अपनी उपज को सीधे बड़े व्यापारिक केंद्रों या निर्यात के माध्यम से बेच सकते हैं। बिचौलियों की भूमिका कम होने से किसान को उचित मूल्य प्राप्त होता है।
- ऋण पर ब्याज में छूट: इस योजना के तहत 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर 3% ब्याज में छूट दी जाती है। यह सुविधा 7 साल तक के लिए लागू होती है, जिससे किसानों पर ब्याज का बोझ कम होता है। यदि कोई किसान रुपये 50 लाख का कर्ज लेता है, तो 3% की छूट से उसे रुपये 1.5 लाख प्रति वर्ष की बचत होगी।
- नवाचार और तकनीकी प्रगति: इस योजना से किसान नवीन तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं, जैसे कि: स्मार्ट वेयरहाउसिंग, सोलर ड्रायर, माइक्रो-कोल्ड स्टोरेज, डिजिटल ट्रैकिंग और प्रोसेसिंग
- स्थानीय और वैश्विक बाजार तक पहुंच: भंडारण और प्रसंस्करण के कारण किसान अपनी उपज को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार कर सकते हैं। इससे निर्यात के अवसर भी बढ़ते हैं।
- बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है: किसान अपनी उपज को सीधे संग्रहण केंद्रों में रख सकते हैं और बाजार मूल्य का इंतजार कर सकते हैं। इससे बिचौलियों द्वारा किए जाने वाले शोषण में कमी आती है।
- कैसे करें आवेदन?
- ऑनलाइन पोर्टल: इस आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आवेदन किया जा सकता है- agriinfra.dac.gov.in
- बैंक के माध्यम से: नाबार्ड और सहकारी बैंकों के माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं।
- आवश्यक दस्तावेज
- आधार कार्ड
- भूमि संबंधी दस्तावेज
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट
- बैंक खाता विवरण

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