‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ अब थमेगा नहीं- शिवराज सिंह चौहान
18 जून 2025। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देशभर में ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ बहुत सफल हुआ है, लेकिन यह अभियान थमेगा नहीं, हम लगातार किसानों के बीच खेतों में जाकर खेती को उन्नत और किसानों को समृद्ध बनाने का प्रयत्न करते रहेंगे। अभियान के अंतर्गत वैज्ञानिकों, अधिकारियों व कृषि विशेषज्ञों की 2170 टीमों ने देशभर में 1.42 लाख से अधिक गांवों में पहुंचकर 1.34 करोड़ से ज्यादा किसानों से सीधा संवाद किया है। अभियान में मुख्यमंत्रीगण, केंद्रीय मंत्रीगण, राज्यों के मंत्री, सांसद, विधायक सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। श्री चौहान ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी देते हुए अभियान के आधार पर तत्काल कुछ निर्णयों का ऐलान भी किया है। यह अभियान 29 मई से 12 जून 2025 तक चलाया गया।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने मीडिया से चर्चा में कहा कि कुछ चीजें हम तत्काल करेंगे। इनमें ज्ञान, अनुसंधान व क्षमताओं का जो गैप है, उस गैप को पाटने की कोशिश करेंगे। दूसरा, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, इसलिए केवीके को एक टीम के रूप में नोडल एजेंसी हर जिले के लिए बनाई जाएगी, जो किसानों के हित में कॉर्डिनेट करेगी। केवीके का एक जैसा स्वरूप और उसे सुदृढ़ करने की दिशा में भी हम काम करेंगे। केवीके के वैज्ञानिक अनिवार्य रूप से सप्ताह में तीन दिन खेतों में किसानों के बीच जाएंगे और कृषि मंत्री के रूप में, मैं स्वयं भी सप्ताह में दो दिन खेतों में किसानों के बीच जाऊंगा। श्री सिंह ने अपने अफसरों को भी कहा है कि दफ्तर में बैठकर सारी चीजें हम नहीं समझ सकते, इसलिए खेतों में जाना होगा। राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय करने के लिए, विकसित खेती और समृद्ध किसान के लिए काम करने वाली जितनी भी संस्थाएं हैं, उनका एक दिशा में चलना अनिवार्य है, और इसलिए इसके समन्वय की भी चर्चा कर निश्चित तौर पर व्यवस्था करेंगे। अब राज्यवार कृषि के लिए आईसीएआर की तरफ से एक नोडल अफसर तय किया जाएगा जो उस राज्य में सारे वैज्ञानिक प्रयोगों को, समस्याओं को, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखकर सलाह और सुझाव देगा, राज्य सरकार से संवाद और संपर्क करेगा।
शिवराज सिंह ने कहा कि अभियान में दो चीजें बहुत प्रमुखता से उभर कर आई हैं, जिन पर काम करने की जरूरत है। एक तो अमानक बीज, दूसरा अमानक पेस्टीसाइड। इनके संबंध में शिकायतें आई हैं इसलिए सीड एक्ट को और कड़ा बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। सिस्टम इतना मजबूत बनाएंगे कि गुणवत्तायुक्त बीज किसानों तक पहुंचें। इस अभियान का उद्देश्य था कि कैसे विज्ञान और किसान को जोड़ें, काम बहुत अच्छा हो रहा है, लेकिन कहीं कमी है तो उत्पादन बढ़ाएं, लागत घटाएं व किसान को और समृद्ध बनाने का प्रयास हम कर सकें, इसके लिए अभियान बहुत सफल हुआ है। इसके लिए उन्होंने कृषि विभाग, विशेषकर आईसीएआर को बधाई दी।
श्री चौहान ने कहा कि ये अभियान थमेगा नहीं, रबी की फसल के लिए विकसित कृषि संकल्प अभियान फिर से चलेगा। इसके अतिरिक्त हम लगातार किसानों के बीच खेतों में जाकर कोशिश करेंगे कि खेती को कैसे उन्नत करें और किसानों को कैसे समृद्ध करें।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 11 सालों में कृषि क्षेत्र में अद्भुत काम हुआ है। अगर मोटे तौर पर हम खाद्यान उत्पादन देखें तो वह 40% बढ़ा है। यह उनकी योजनाओं, विजन और कार्यक्रमों का ही प्रभाव है फिर भी और काम करने की अनंत संभावनाएं हैं। हमारे सामने लक्ष्य भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पोषणयुक्त अनाज, फल-सब्जियां, पर्याप्त मात्रा में लोगों के लिए उपलब्ध कराना है। किसानों की आजीविका ठीक ढंग से चले, खेती फायदे का धंधा बने, इसकी कोशिश करना है, और धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उत्पादन देने वाली बनाए रखना है, साथ ही भारत को दुनिया का फूड बॉस्केट बनाना है।
श्री सिंह ने कहा कि काम तो बहुत हो रहा है, लेकिन अलग-अलग संस्थाएं, अलग-अलग कामों में लगी हुई हैं। आईसीएआर व केवीके में वैज्ञानिक लगे हुए हैं, अलग-अलग रिसर्च करते हैं। किसान खेतों में काम करते हैं तो एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी अलग काम करती है, और केंद्र व राज्य सरकार के विभाग अपने-अपने काम कर रहे हैं। मन में ये विचार आया कि सभी काम कर रहे हैं लेकिन अलग-अलग काम कर रहें हैं। यहीं से वन नेशन-वन एग्रीकल्टर-वन टीम का विचार आया। एक ऐसी टीम जिसमें सभी मिलकर एक दिशा में काम करें, जिनमें किसान भी शामिल हों। इसी को हमने विकसित कृषि संकल्प अभियान की रूपरेखा बनाया।
श्री सिंह ने बताया कि हमने कोशिश की कि ये अभियान सर्वव्यापी हो, इसलिए ट्राइबल डिस्ट्रिक्ट्स पर भी विशेष ध्यान दिया। ऐसे 177 जिलों के 1024 विकासखंडों में साढ़े 8 हजार से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित हुए और लगभग 18 लाख किसानों तक हम पहुंचे। प्रधानमंत्री जी का एक और फोकस है- आकांक्षी जिले, इन जिलों में भी हमने प्रयास किया कि ये ना छूट जाएं, क्योंकि यहां काम करने की ज्यादा जरूरत है। 112 आकांक्षी जिलों में 802 ब्लॉक्स में टीमें लगभग 6800 गांवों में पहुंची और 15 लाख किसानों से वैज्ञानिकों का संवाद हुआ। एक और फोकस हमने वाईब्रेंट विलेज पर भी किया था, वो जिले भी लगभग 100 हैं, तो उनमें भी हमने कोशिश की है कि हर जिले का कोई न कोई एक सीमावर्ती गांव लिया जाएं, सुदूर के गांवों में भी हमारे वैज्ञानिक पहुंचे। अभियान में सबसे बड़ी सफलता रही हमारी किसान चौपाल, जहां किसानों से
सार्थक चर्चा हुई।

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