Krishi Chaupal

10000 नये कृषि उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन

10000 नये कृषि उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन

Jul 26, 2025
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​भारत सरकार ने किसानों की आय और कृषि क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2020 में ‘10,000 नये किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन और संवर्धन योजना’ शुरू की थी। पांच वर्षों के तय समय में एफपीओ स्थापित करने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। इस योजना का उद्देश्य छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को संगठित करके उन्हें प्रौद्योगिकी, वित्त, इनपुट और बाजार तक बेहतर पहुंच प्रदान करना था। एफपीओ किसानों के लिए एक क्रांतिकारी कदम है जो उन्हें संगठित और आत्मनिर्भर बनाता है। यह न केवल कृषि उत्पादन और व्यापार को बेहतर बनाता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करता है। यदि किसानों को सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण मिले तो एफपीओ ग्रामीण भारत के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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  • योजना के मुख्य बिन्दु
  • शुरुआत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 फरवरी 2020 को चित्रकूट, उत्तर प्रदेश से
  • कार्यन्वयन एजेंसियाँ:
  • एसएफएसी: स्माल फारमर्स एग्रीबिजनेस कर्न्सोटियम
  • नाबार्ड: नेशनल बैंक ऑफ एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलेपमेंट
  • एनसीडीसी: नेशनल कोऑपरेटिव डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन
  • खासियत: प्रति एफपीओ 2 करोड़ रुपये तक के परियोजना ऋण की गारंटी
  • कृषि उत्पादक संगठन (FPO) क्या है?
  • कृषि उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organisation – FPO) किसानों का एक समूह या संगठन होता है, जिसे सहकारी समितियों, कंपनियों या किसी अन्य कानूनी इकाई के रूप में पंजीकृत किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को एक मंच प्रदान करना है ताकि वे सामूहिक रूप से खेती से जुड़े कार्यों को बेहतर तरीके से कर सकें और अपनी उपज का सही मूल्य प्राप्त कर सकें।
  • योजना की प्रमुख विशेषताएं
  • वित्तीय सहायता: प्रत्येक एफपीओ को तीन वर्षों तक प्रबंधन लागत के लिए 18 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा, प्रत्येक किसान सदस्य को 2,000 रुपये का इक्विटी अनुदान दिया जाता है, जिसकी सीमा प्रति एफपीओ 15 लाख रुपये तक है। ​
  • ऋण गारंटी सुविधा: एफपीओ की संस्थागत ऋण पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पात्र ऋणदाता संस्थानों से प्रति एफपीओ 2 करोड़ रुपये तक के परियोजना ऋण की गारंटी सुविधा दी जाती है। ​
  • महिला सहभागिता: एफपीओ में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। 22 जुलाई 2024 तक, 810 एफपीओ पूरी तरह से महिला सदस्यों के साथ पंजीकृत किए गए थे, और कुल 19,82,835 किसानों में से 6,86,665 महिला किसान थीं। ​
  • सफलता: फरवरी 2025 तक, सरकार ने 10,000 एफपीओ स्थापित करने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। बिहार के खगड़िया जिले में पंजीकृत 10,000वां एफपीओ मक्का, केला और धान पर केंद्रित है। देश में लगभग 30 लाख किसान एफपीओ से जुड़े हैं, जिनमें से लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं हैं।
  • एफपीओ के उद्देश्य
  • छोटे किसानों की संख्या बढ़ाने के लिए एकत्रित करना, ताकि सामूहिक रूप से बाजार में मजबूत पकड़ बन सके।
  • समूह में उत्पादन और विपणन की योजना बनाना और उत्पाद को सीधा बाजार तक पहुंचाना।
  • सामूहिक रूप से उत्पादन सामग्री की खरीद से लागत में कमी और उत्पाद की बिक्री से अधिक लाभ सुनिश्चित करना।
  • किसानों को कृषि के आधुनिक तरीकों और तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • बेहतर गुणवत्ता और बड़ी मात्रा में उत्पादन के द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाना।
  • किसानों को एकजुट करके उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना
  • कृषि उत्पादन की लागत को कम करना
  • किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली बीज, उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना
  • कृषि उत्पादों के भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन में सहयोग देना
  • किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों से जोड़ना
  • किसानों को बाजार तक सीधी पहुंच दिलाकर बिचौलियों की भूमिका कम करना
  • एफपीओ के प्रकार
  • कृषि आधारित एफपीओ: फसल उत्पादन, जैविक खेती, बीज उत्पादन आदि
  • पशुपालन आधारित एफपीओ: डेयरी, पोल्ट्री, बकरी पालन आदि
  • मछली पालन आधारित एफपीओ: मत्स्य पालन, झींगा पालन आदि
  • बागवानी आधारित एफपीओ: फूलों, फलों, सब्जियों की खेती
  • वन उत्पाद आधारित एफपीओ: लकड़ी, जड़ी-बूटियों, गैर-काष्ठ वन उत्पादों का व्यापार
  • एफपीओ द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं
  • गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और कीटनाशक उचित दरों पर उपलब्ध कराना।​
  • उत्पादन और उत्पादन के बाद की मशीनरी और उपकरण कस्टम हायरिंग के आधार पर उपलब्ध कराना।​
  • सफाई, छंटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और प्रसंस्करण सुविधाएं प्रदान करना।​
  • भंडारण और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराना।​
  • उच्च आय वाली गतिविधियां जैसे बीज उत्पादन, मधुमक्खी पालन, मशरूम की खेती आदि शुरू करना।​
  • बाजार की जानकारी की सुविधा प्रदान करना और उपज के विपणन में सहायता करना।
  • योजना के अंतर्गत लाभ
  • प्रारंभिक पूंजी सहायता: प्रत्येक एफपीओ को रुपये 15 लाख तक की वित्तीय सहायता दी जाती है।
  • प्रशिक्षण और सलाहकार सेवाएँ: किसानों को उत्पादन, विपणन, पैकेजिंग और गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • बाजार से सीधा जुड़ाव: सरकार द्वारा ई-नाम और अन्य डिजिटल प्लेटफार्म से सीधे बाजार तक उत्पाद पहुँचाया जाता है।
  • भंडारण और प्रोसेसिंग की सुविधा: सामूहिक रूप से भंडारण और प्रोसेसिंग की सुविधा मिलती है, जिससे खराबी कम होती है।
  • ऋण सुविधा और सब्सिडी: बैंकों द्वारा आसान शर्तों पर ऋण की सुविधा और सरकारी सब्सिडी दी जाती है।
  • एफपीाओ का गठन कैसे होता है?
  • किसानों का पंजीकरण: न्यूनतम 10 किसान और अधिकतम 1000 किसान एक समूह में पंजीकृत हो सकते हैं।
  • संरचना का निमार्ण: संगठन का नाम, नियमावली और संचालन की रूपरेखा तैयार की जाती है।
  • आवश्यक अनुमति: सरकार और संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति ली जाती है।
  • व्यवस्थापन और संचालन: संचालन समिति का गठन किया जाता है और कार्यों का विभाजन किया जाता है।
  • वित्तपोषण और क्रियान्वयन
  • इस योजना का क्रियान्वयन कृषि सहकारिता और किसान कल्याण विभाग द्वारा किया जा रहा है। इसमें तीन मुख्य एजेंसियाँ शामिल हैं:-
  • नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक)
  • एसएफएसी (स्माल फार्मर्स एग्रीबिजनेस कर्न्सोटियम)
  • एनसीडीसी (नेशनल कोआॅपरेटिव डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन)
  • इन एजेंसियों का कार्य
  • एफपीओ के गठन में सहायता प्रदान करना।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना।
  • किसानों को तकनीकी सहायता और बाजार संपर्क प्रदान करना।
  • प्रमुख चुनौतियाँ
  • जानकारी की कमी: ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को इस योजना की पूरी जानकारी नहीं है।
  • भंडारण और लॉजिस्टिक्स की समस्या: उत्पादन के बाद सही भंडारण और लॉजिस्टिक्स का अभाव।
  • बाजार में प्रतिस्पर्धा: बड़े व्यापारिक घरानों के सामने छोटे किसान उत्पादकों को मुश्किलें होती हैं।
  • वित्तीय प्रबंधन: किसानों को वित्तीय प्रबंधन और क्रेडिट तक पहुँच की समस्या।
  • समाधान के उपाय:
  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार
  • ई-नाम और डिजिटल मार्केटिंग का प्रचार
  • उन्नत भंडारण और प्रोसेसिंग की व्यवस्था
  • स्थानीय बाजार और वैश्विक निर्यात से जुड़ाव
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