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सरगुजा संभाग के प्रतापपुर में युवा किसान ने नवाचार कर शुरू की सेब की खेती

सरगुजा संभाग के प्रतापपुर में युवा किसान ने नवाचार कर शुरू की सेब की खेती

May 3, 2023
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छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। कुछ समय पहले तक छत्तीसगढ़ के किसान धान की फसल के अलावा दूसरी फसलों के बारे में सोचते भी नहीं थे। लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा किसानों के लिए शुरू की गयी जनहितकारी योजनाओं के चलते किसान अब नवाचार कर रहे हैं। धान के बदले दूसरी फसलें लेने के लिए शासन द्वारा शुरू की गयी योजना का लाभ लेकर किसान छत्तीसगढ़ जैसे गर्म प्रदेश में सेब की खेती कर रहे हैं।
सेब की खेती ठंडे प्रदेशों में हो सकती है, इस मिथक को तोड़ने की कोशिश प्रतापपुर के एक युवा कृषक ने की है। मुकेश गर्ग नाम के कृषक ने सूरजपुर जिले के प्रतापपुर जैसी गर्म जगह में अलग-अलग किस्म के सेब के सौ से ज्यादा पौधे लगाए हैं और कुछ में तो फल भी आने शुरू हो गए हैं। कुछ ही समय में ये पूरी तरह से तैयार होकर खाने लायक हो जायेंगे। कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में कहीं भी सेब की खेती हो सकती है और ये किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
आमतौर पर सेब हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड जैसे कम तापमान वाले राज्यों में होता है क्योंकि वहां का मौसम सेब की खेती के लिए अनुकूल है। छत्तीसगढ़ का मौसम गर्म है और उसे सेब के अनुकूल नहीं माना जाता और इसकी खेती सपने जैसी है। लेकिन अब गर्म स्थानों में भी सेब की खेती हो सकती है।

उद्यान विभाग से मिली जानकारी
मुकेश गर्ग से मिली जानकारी के अनुसार खेती से उनका जुड़ाव शुरू से है।वे हमेशा कुछ अलग करने का प्रयास करते हैं। इस बीच उन्हें जानकारी मिली कि हिमाचल प्रदेश में सेब की ऐसी किस्म विकसित हुई है जो गर्म प्रदेशों में भी उग सकते हैं। मुकेश ने इसके लिए कृषि एवं उद्यानिकी विभाग से सम्पर्क किया और प्रतापपुर में सेब की नई किस्म के पौधे लगाए। उन्होंने इनके रोपण और रखवाली को लेकर उनसे और तरीके समझे तथा पौधे आर्डर किये और उनका रोपण कराया। एक वर्ष की अवधि में ये पौधे चार से छह फीट के हो चुके हैं,कई में फल भी आ चुके हैं।
पौधों की रखवाली और रोपण में तरीकों को लेकर उन्होंने बताया कि इसका मुख्य समय नवंबर से फरवरी के बीच होता है। इसके लिए उन्होंने पहले से ही दो बाई दो फीट गड्ढे तैयार करके रखे थे और गड्ढों को दीमक रोधी दवा (रीजेंट) से उपचारित किया गया था। गड्ढों में गोबर, मिट्टी और थोड़ा सा डीएपी डालकर पानी से भरकर रखे गए थे। इसका फायदा यह होता है कि गड्ढों को जितना बैठना होता है बैठ जाता है और पौधे लगने के बाद इनके रेशे टूटने का डर नहीं होता है। इसके बाद 1-2 दिन में पौधे रोपित कर दिए थे। इनके लिए ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है, केवल गर्मियों में दो से तीन दिन में पानी देना होता है। ध्यान रखना होता है कि पौधों में बारिश के पानी का जमाव नहीं हो क्योंकि जड़ों के सड़ने का डर होता है।

सेब की इस किस्म के लिए 50 डिग्री तक का तापमान है अनुकूल
मुकेश गर्ग बताते हैं कि आमतौर पर सेब की फसल ठंडे प्रदेशों में होती है लेकिन सेब की फसल हरमन-99 के लिए अधिकतम 50 डिग्री तक का तापमान अनुकूल है। हरमन के साथ अन्ना और डोरसेट किस्म भी यहां के तापमान के अनुकूल है।

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