बाजार हस्तक्षेप योजना एवं मूल्य समर्थन योजना
भारत सरकार द्वारा किसानों की आय को सुरक्षित रखने और उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से बचाने के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) और मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) चलाई जाती हैं। ये योजनाएँ विशेष रूप से उन परिस्थितियों में लागू होती हैं जब कृषि उत्पादों की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे गिर जाती हैं या जिन उत्पादों को एमएसपी के तहत कवर नहीं किया गया है। बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) और मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) दोनों ही केंद्र सरकार की योजनाएँ हैं जो कृषि उत्पादों की कीमतों में अस्थिरता और किसानों को होने वाले नुकसान को कम करने के उद्देश्य से बनाई गई हैं। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उनकी फसल का उचित मूल्य प्राप्त होता है।
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- योजना के मुख्य बिन्दु
0 शुरुआत: आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत वर्ष 2020 में चलायी गयी
खासियत:
0 मधुमक्खी पालन से किसानों की आय को दोगुना करने में मदद करना।
0 ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न करना।
0 प्रति बॉक्स 50 रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान।
0 नेशनल बी बोर्ड के माध्यम से प्रशिक्षण की सुविधा।
- बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस)
बाजार हस्तक्षेप योजना का उद्देश्य उन कृषि और बागवानी उत्पादों के लिए समर्थन प्रदान करना है जो नाशवान होते हैं और एमएसपी के तहत नहीं आते, विशेषकर जब इनकी कीमतें अचानक गिर जाती हैं और किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ता है। यह योजना मुख्य रूप से जल्दी खराब होने वाले उत्पादों जैसे फल और सब्जियों के लिए लागू होती है।
- प्रमुख विशेषताएँ
0 यह योजना राज्य सरकारों के अनुरोध पर लागू की जाती है।
0 जब किसी उत्पाद की कीमत पिछले सामान्य वर्ष की तुलना में कम से कम 10% गिर जाती है या उत्पादन में 10% की वृद्धि होती है, तब यह योजना लागू होती है।
0 राज्य और केंद्र सरकार के बीच घाटे का वहन 50:50 के अनुपात में किया जाता है।
0 उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए यह अनुपात 75:25 होता है, जिसमें केंद्र सरकार 75% और राज्य सरकार 25% घाटे का वहन करती है।
0 इस योजना में सेब, लहसुन, अदरक, अंगूर, संतरा, टमाटर, प्याज, आलू आदि जैसे नाशवान उत्पादों को शामिल हैं।
- मुख्य लाभ
0 मूल्य स्थिरता: बाजार में फसल की अधिक आपूर्ति के कारण जब मूल्य गिरता है, तब सरकार हस्तक्षेप करके उचित मूल्य पर खरीद करती है।
0 तत्काल खरीदारी: राज्य सरकारें केंद्र सरकार के सहयोग से तत्काल खरीदारी करती हैं ताकि किसानों को जल्द से जल्द भुगतान मिले।
0 बबार्दी की रोकथाम: जल्दी खराब होने वाली फसलों को खरीदा जाता है, जिससे उनकी बबार्दी कम होती है।
0 किसानों को वित्तीय सुरक्षा: किसान अपनी फसल को बिना नुकसान के उचित मूल्य पर बेच सकते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
- मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस)
मूल्य समर्थन योजना मुख्य रूप से गैर-नाशवान फसलों जैसे दलहन, तिलहन और कपास के लिए लागू होती है। इस योजना के अंतर्गत, सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल की खरीद करती है।
- प्रमुख विशेषताएँ
0 यह योजना मुख्यत: तिलहन, दलहन और कपास जैसी फसलों पर लागू होती है।
0 राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) और राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एफसीआई) जैसी केंद्रीय नोडल एजेंसियाँ इन फसलों की खरीदारी करती हैं।
0 जब बाजार मूल्य एमएसपी से नीचे चला जाता है, तब सरकार इन फसलों की खरीद एमएसपी पर करती है।
0 यह योजना तब तक लागू रहती है जब तक बाजार मूल्य एमएसपी के बराबर या उससे ऊपर नहीं आ जाता।
- मुख्य लाभ
0 न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी: किसानों को फसल का एक निश्चित न्यूनतम मूल्य प्राप्त होता है, चाहे बाजार का मूल्य कुछ भी हो।
0 मूल्य में गिरावट से बचाव: यदि बाजार मूल्य एमएसपी से कम हो जाता है, तो सरकार फसल की खरीद एमएसपी पर करती है।
0 भंडारण और बिक्री की सुविधा: खरीदी गई फसल का भंडारण और उपयुक्त समय पर बाजार में बिक्री की जाती है, जिससे बाजार में स्थिरता बनी रहती है।
0 फसल विविधिकरण को प्रोत्साहन: दलहन, तिलहन और कपास जैसी फसलों की अधिक पैदावार को बढ़ावा मिलता है।
0 राज्य सरकारों का सहयोग: राज्य सरकारें केंद्र सरकार की मदद से खरीदारी करती हैं, जिससे किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होता है।
- एमआईएस और पीएसएस में अंतर
- एमआईएस: बाजार में कीमत गिरने पर हस्तक्षेप
- पीएसएस: न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी
- एमआईएस: जल्दी खराब होने वाली फसलें (फल, सब्जियाँ)
- पीएसएस: गैर-नाशवान फसलें (दलहन, तिलहन, कपास)
- एमआईएस: राज्य सरकारें केंद्र के सहयोग से खरीदती हैं
- पीएसएस: राज्य और केंद्रीय एजेंसियाँ (नैफेड, एफसीआई) खरीदती हैं
- एमआईएस: वित्तीय स्रोत केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से
- पीएसएस: केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित
- एमआईएस:समयावधि तात्कालिक, फसल कटाई के समय
- पीएसएस: लंबी अवधि, एमएसपी आधारित
- किसानों के लिए प्रमुख लाभ
0 न्यूनतम मूल्य की गारंटी: दोनों योजनाओं में किसानों को उनकी फसल का एक निश्चित मूल्य मिलता है, जिससे उन्हें घाटा नहीं होता।
0 फसल की बबार्दी में कमी: समय पर खरीद से फसल खराब होने का खतरा कम होता है।
0 आर्थिक सुरक्षा: किसानों को समय पर भुगतान मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। उनकी आय में स्थिरता आती है।
0 मूल्य स्थिरता: बाजार में अचानक आई गिरावट का असर कम होता है। बाजार में मूल्य स्थिरता बनी रहती है, जिससे उपभोक्ताओं को भी लाभ होता है।
- एमर्आएस-पीएसएस के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया
0 पंजीकरण: किसानों को संबंधित राज्य या केंद्रीय एजेंसी के पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है।
0 दस्तावेज: पहचान पत्र, भूमि दस्तावेज, बैंक खाता विवरण, कृषि प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र और पासपोर्ट आकार की फोटो आवश्यक होती है।
0 आवेदन: पंजीकरण के बाद, किसान अपनी उपज के लिए आवेदन करते हैं।
0 खरीदारी: सरकारी एजेंसियाँ निर्धारित मूल्य पर किसानों से उपज की खरीदारी करती हैं।

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