उल्लास से भरा रहे 2024
अशोक त्रिपाठी।
हमारे भारत की संस्कृति और सभ्यता ने चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नये वर्ष का शुभारम्भ माना है क्योंकि उस समय बहुत कुछ नया-नया दिखता है लेकिन पाश्चात्य काल गणना के अनुसार पहली जनवरी से नया वर्ष मनाया जाता है। वैश्विक मान्यता है, इसलिए अपने देश में भी इसे नाच-गाकर, होहल्ला करके मनाने की जो परम्परा शुरू हुई, उसे नयी पीढ़़ी निरंतर आगे बढ़ा रही है और बाकी लोगों को भी उनके साथ खड़े होने की मजबूरी है, कहने को कोई चाहे कितना भाषण दे। इसलिए नये वर्ष से हमें कामना करनी चाहिए कि बीते साल 2023 में दुनिया भर में जो रक्तपात हो रहा है, मिसाइलें छोड़ी जा रही हैं और राकेट-बम बरसाये जा रहे हैं, उनको रोका जाए। जीवन ही नहीं रहेगा तो शुभकामनाए बेमानी हो जाती हैं। इसके अलावा भी बहुत सी बाते हैं। पाश्चात्य न्यू इयर कड़ाके की सर्दी के बीच आता है। हमको अपने देश में कई शहरों-कस्बों में सड़क के फुटपाथ पर चिथड़ों में लिपटे-सिकुड़ते लोग दिखे हैं। इसी साल 22 जनवरी को अयोध्या में प्रभु रामलला को पक्का मकान मिला है। नये वर्ष में फुटपाथ पर सर्दियों में सोने वालों को भी पक्का मकान मिले और राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर जैसा उल्लास है, उसी तरह का माहौल 2024 में रहे। नये वर्ष से यह भी कामना है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं 2024 में उम्मीदों का पिटारा खुलने वाला है। सबसे पहले राम मंदिर का उद्घाटन होगा। यह 22 जनवरी को होगा या कहें इसकी प्राण प्रतिष्ठा रखी जाएगी। ये सिर्फ धार्मिक और राजनीतिक रूप से ही बड़ा नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए भी बहुत जरूरी है। यूपी भारत के गरीब राज्यों में से एक माना जाता था, लेकिन वहां 2017 से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राजनीतिक स्थिरता लौटी है, जिससे आर्थिक विकास के भी संकेत मिले हैं। लेकिन राम मंदिर के उद्घाटन के बाद ये विकास दोगुना होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां 30 दिसम्बर को 15,700 करोड़ रुपये से अधिक के कुल निवेश वाली कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। रामलला के टेंट में विराजमान होने को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, एक समय था, जब यहीं अयोध्या में रामलला टेंट में विराजमान थे। आज पक्का घर सिर्फ रामलला को ही नहीं, बल्कि पक्का घर देश के 4 करोड़ गरीबों को भी मिला है। आज का भारत अपने तीर्थों को भी संवार रहा है, वहीं डिजिटल टेक्नोलॉजी की दुनिया में भी छाया हुआ है।
2023-24 में भारत की अर्थव्यवस्था 7 फीसद तक बढ़ने की उम्मीद है, और 2024-25 भी उतना ही शानदार रह सकता है। अगर अमेरिका और यूरोप भारी मंदी में न फंसें। भारत के अंदरूनी हालात अच्छे हैं, खासकर चुनावी सालों में राज्यों का खर्च बढ़ने से। 2024 में लोकसभा चुनाव के अलावा, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। जम्मू-कश्मीर में भी चुनाव होंगे, लेकिन सबसे बड़ी बात शायद सितंबर से पहले राज्य का दर्जा बहाल होना है। अनुच्छेद 370 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसले को सही ठहराते हुए वहां राज्य बहाली का रास्ता जल्द से जल्द स्पष्ट करने को कहा था। इसलिए 2024 में अच्छे बदलाव आएंगे।
आने वाले साल से भारत के लोगों को विकास के लिहाज से काफी उम्मीदें हैं। साल 2023 की बात करें तो भारत के हिस्से में कई ऐतिहासिक पल आए। जी-20 की मेजबानी हो या चंद्रयान-3 की सफलता या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेट्स यानी मोटे अनाज को मिली पहचान की बात हो, भारत पूरे 2023 में चमकता दिखा। चारों और भारत की चर्चाएं हुईं। 77वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का श्रेय भारत के 140 करोड़ लोगों के प्रयासों को दिया था।
देश की जनगणना 2024 में होनी ही चाहिए, ये न सिर्फ चुनाव क्षेत्रों के सीमांकन के लिए जरूरी है, बल्कि संसद में पास हो चुके 33 फीसद महिला आरक्षण बिल को लागू करने के लिए भी जरूरी है। अगर इस साल जनगणना शुरू हुई, तो नतीजे 2025 तक ही मिलेंगे, जिससे 2029 तक लोकसभा सीटें बढ़ाने का काम थोड़ा मुश्किल हो जाएगा। 2024 में अच्छी बारिश की उम्मीद के साथ-साथ, गगनयान प्रोजेक्ट भी पूरे साल सुर्खियों में रहेगा। इस साल कई टेस्ट लॉन्च होंगे, और अगर सब कुछ ठीक रहा, तो ये भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन की तैयारियों को गति देंगे। कुल मिलाकर, 2024 एक ऐसा साल हो सकता है जिसमें भारत कई क्षेत्रों में ऊंचाइयां छू सकता है।
2024 में खेल जगत में सबसे ज्यादा धूम मचेगी क्रिकेट की टी-20 विश्व कप की! ये जून में अमेरिका और वेस्टइंडीज में होगा। उम्मीद है इस बार हमारी टीम 2023 के वनडे विश्व कप जैसा निराश नहीं करेगी। इससे पहले, मार्च-मई में भारत में महिला आईपीएल और पुरुष आईपीएल का भी रोमांच देखने को मिलेगा। व्यापार जगत भी इन लीगों से खूब कमाई की उम्मीद कर रहा है।
साल 2023 जलवायु परिवर्तन के लिए अच्छा नहीं रहा। यह अब तक का सबसे गर्म साल था। इस साल कार्बन उत्सर्जन ने नए रिकॉर्ड बनाए। एक बार फिर साबित हुआ कि जलवायु संकट से निपटने के लिए हो रहे प्रयासों में हम बहुत ही पीछे थे। जर्मन थिंक टैंक न्यू क्लाइमेट इंस्टीट्यूट के शोध ने साल 2024 के लिए उम्मीद भरी तस्वीर खींची है। जलवायु को लेकर ऐसे बदलाव हो रहे हैं जो 2024 में असर जरूर दिखाएंगे।
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि वाणी की मधुरता से व्यक्ति सफल बन सकता है और ऐसे लोगों को हर जगह सम्मान मिलता है। यही नहीं मीठा बोलने से शत्रु को भी मित्र बनाया जा सकता है। आमतौर पर क्रोध में आकर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को कटु वचन बोल देता है। हालांकि, ऐसा करना सही नहीं है। इसलिए इस नए साल पर वाणी पर नियंत्रण बनाए रखने का प्रण लें। विशेष रूप से नेता नगरी के लोगों से यह अपेक्षा की जाती है जो संसद का वेश कीमती समय बर्बाद कर देते हैं। मौजूदा सरकार ने भारत की आजादी को 75 साल पूरे होने पर चलाए जा रहे अमृत काल अभियान को लेकर बार-बार यह कहते नजर आए कि देश 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार ने यह भी भरोसा जताया कि हर बाधा को पार करते हुए सफलतापूर्वक देश अपने लक्ष्यों तक पहुंचेगा। वर्ष 2024 इस दिशा में सार्थक साबित हो, यही कामना है। (हिफी)

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