Krishi Chaupal

एकीकृत बागवानी विकास मिशन

एकीकृत बागवानी विकास मिशन

Jul 26, 2025
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एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) योजना को 2014-15 से देश में बागवानी के समग्र विकास के लिए लागू किया गया है, जिसमें फल, सब्जियां, जड़ और कंद वाली फसलें, मशरूम, मसाले, फूल, सुगंधित पौधे, नारियल, काजू और कोको शामिल हैं। सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश इस योजना के अंतर्गत आते हैं। मिशन एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे राज्य सरकारों के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। सभी राज्यों में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच 60:40 के अनुपात में सब्सिडी साझा की जाती है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में सहायता का पैटर्न 90:10 के अनुपात में साझा किया जाता है। इसलिए, मिशन की सफलता के लिए राज्य सरकारों का सक्रिय समर्थन सर्वोपरि है।
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  • प्रमुख उद्देश्य

  • बागवानी उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना।
  • पोषण सुरक्षा में सुधार और किसानों की आय में वृद्धि करना।
  • फसलोपरांत प्रबंधन, प्रसंस्करण और विपणन के लिए बुनियादी ढांचे का विकास करना।
  • नई तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने को बढ़ावा देना।
  • जैविक खेती और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना।
  • उप-योजनाएँ

  • एमआईडीएच के अंतर्गत निम्नलिखित उप-योजनाएँ शामिल हैं:-
  • राष्ट्रीय बागवानी मिशन: यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों को छोड़कर) में लागू होती है।
  • पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए बागवानी मिशन: यह योजना पूर्वोत्तर राज्यों और हिमालयी क्षेत्रों (जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) में लागू होती है।
  • राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड: यह बोर्ड बागवानी क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं को कार्यान्वित करता है।
  • नारियल विकास बोर्ड: यह बोर्ड नारियल उत्पादन और उससे संबंधित गतिविधियों के विकास के लिए कार्य करता है।
  • केंद्रीय बागवानी संस्थान: यह संस्थान बागवानी क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए कार्य करता है।
  • वित्तीय सहायता पैटर्न

  • सामान्य राज्यों के लिए: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 के अनुपात में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए: यहाँ केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 90:10 के अनुपात में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • केंद्र शासित प्रदेशों के लिए: केंद्र सरकार 100% वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • पात्रता और लाभ

  • पात्रता: किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का किसान, किसान समूह, एफपीओ (FPO), एफपीसी (FPC), सहकारी समिति, या उद्यमी इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं।
  • लाभ:
  • गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री की आपूर्ति।
  • बागवानी क्षेत्र का विस्तार और पुनरुद्धार।
  • फसलोपरांत प्रबंधन और विपणन के लिए बुनियादी ढांचे का विकास।
  • प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण।
  • जैविक खेती और नई तकनीकों को अपनाने के लिए सहायता।
  • आवेदन प्रक्रिया

  • राज्य उद्यानिकी विभाग से संपर्क: अपने राज्य के उद्यानिकी विभाग की वेबसाइट या कार्यालय से योजना की जानकारी प्राप्त करें।
  • आवश्यक दस्तावेज: आवेदन पत्र, भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र, पहचान पत्र, बैंक खाता विवरण आदि तैयार रखें।
  • ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन: राज्य के निदेर्शानुसार आॅनलाइन पोर्टल या विभागीय कार्यालय में आवेदन जमा करें।
  • अनुमोदन और निरीक्षण: आवेदन की समीक्षा के बाद विभागीय अधिकारी निरीक्षण करेंगे और अनुमोदन प्रदान करेंगे।
  • वित्तीय सहायता प्राप्ति: अनुमोदन के बाद निर्धारित वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  • अधिक जानकारी के लिए

  • अधिक जानकारी और आवेदन के लिए midh.gov.in पर जाएँ।
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