राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम)
ई-नाम (National Agriculture Market – eNAM) भारत सरकार की एक आॅनलाइन कृषि विपणन पहल है, जिसे कृषि उत्पादों की पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन ट्रेडिंग को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है। यह एक पैन-इंडिया इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जो देश भर की कृषि उपज विपणन समितियों (APMCs) को एक जगह पर लाकर किसानों के साथ जोड़ता है। ई-नाम किसानों को पारंपरिक बाजार प्रणाली से डिजिटल व्यापार की ओर ले जाता है जिसमें पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा के चलते किसानों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिलता है।
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योजना के मुख्य बिन्दु
- शुरुआत: 14 अप्रैल 2016
- लॉन्चिंग स्थान: विज्ञान भवन, नई दिल्ली
- ई-नाम का पूरा नाम ‘राष्ट्रीय कृषि बाजार’ (National Agriculture Market) है। यह एक ऑनलाइन व्यापारिक प्लेटफॉर्म है, जो किसानों, व्यापारियों और कृषि उत्पाद विपणन समितियों (APMCs) को आपस में जोड़ता है।
- वर्तमान में 1000 से अधिक मंडियाँ इस प्लेटफॉर्म से जुड़ी हैं।
- 180 से अधिक कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री इस प्लेटफॉर्म पर होती है।
- 24 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया है।
ई-नाम (e-NAM) की विशेषताएँ
- ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म: यह किसानों को अपनी उपज को देशभर की विभिन्न मंडियों में ऑनलाइन बेचने की सुविधा देता है।
- एकीकृत राष्ट्रीय बाजार: इससे स्थानीय मंडियों की सीमाएँ खत्म होती हैं और किसान पूरे देश में अपने उत्पाद बेच सकते हैं।
- पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा: ऑनलाइन बोली लगाने की प्रणाली से किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलता है।
- एमएसपी और बाजार भाव की जानकारी: किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य पता चलता है और वे सही समय पर सही निर्णय ले सकते हैं।
- मंडी शुल्क में कमी: ऑनलाइन व्यापार से बिचौलियों की भूमिका कम होती है, जिससे किसानों को अधिक लाभ होता है।
- डिजिटल भुगतान: किसानों को उनकी बिक्री का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त होता है, जिससे भुगतान में देरी की समस्या कम होती है।
- विभिन्न कृषि उत्पादों की बिक्री: अनाज, फल, सब्जियां, मसाले, तिलहन, दलहन, कपास आदि की खरीद-फरोख्त होती है।
ई-नाम (e-NAM) का उद्देश्य
- किसानों को अधिक लाभ दिलाना
- कृषि बाजार की पारदर्शिता बढ़ाना
- डिजिटल कृषि व्यापार को बढ़ावा देना
- देशभर में कृषि उपज की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करना
ई-नाम (e-NAM) के लाभ
- किसानों को उचित मूल्य: ऑनलाइन नीलामी से फसलों के बेहतर दाम मिलते हैं।
- बिचौलियों की कमी: सीधा खरीदारों से संपर्क होने से बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है।
- समय और खर्च की बचत: किसानों को मंडी जाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे समय और परिवहन लागत बचती है।
- देशभर के खरीदारों से जुड़ने का मौका: किसानों को केवल स्थानीय मंडियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
- भुगतान की सुरक्षा: डिजिटल भुगतान होने से लेनदेन सुरक्षि होता है और बाजार में पारदर्शिता बढ़ती है।
ई-नाम (e-NAM) से जुड़े कुछ आंकड़े
(2024 के अनुसार)
0 कुल पंजीकृत किसान: 1.75 करोड़ से अधिक
0 कुल पंजीकृत व्यापारी: 2 लाख से अधिक
0 कुल पंजीकृत कमीशन एजेंट: 1 लाख से अधिक
ई-नाम (e-NAM) पर पंजीकरण कैसे करें?
- किसानों के लिए
0 किसान ई-नाम पोर्टल (enam.gov.in) पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं।
0 जरूरी दस्तावेज
0 आधार कार्ड
0 बैंक खाता विवरण
0 जमीन के कागजात
- व्यापारियों और खरीददारों के लिए
0 जीएसटी नंबर
0 पैन कार्ड
0 व्यापार लाइसेंस
0 बैंक खाता विवरण

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