प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) एक व्यापक योजना है जिसे किसानों की उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता को बढ़ाना, खेती की लागत को कम करना और किसानों की आय को बढ़ावा देना है। यह योजना मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस), मूल्य कमी भुगतान योजना (पीडीपीएस) और बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) सहित विभिन्न मूल्य समर्थन उपायों को एकीकृत करती है। इसका मुख्य लक्ष्य किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और बाजार मूल्य के बीच अंतर का भुगतान करना है, जिससे उन्हें संकटपूर्ण बिक्री से बचाया जा सके। यह योजना सितंबर 2018 में शुरू की गई थी और इसे 2025-26 तक विस्तारित किया गया है।
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- योजना के उद्देश्य
0 किसानों को एमएसपी के माध्यम से मूल्य सुरक्षा प्रदान करना।
0 दलहन, तिलहन और कोपरा की खरीद को मजबूत करना।
0 किसानों को बाजार में मूल्य अस्थिरता से बचाना और उनकी आय में स्थिरता लाना।
0 आयात पर निर्भरता कम करके घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना।
- योजना के मुख्य घटक
मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस):
0 जब बाजार मूल्य एमएसपी से नीचे चला जाता है, तो केंद्र सरकार द्वारा नामित एजेंसियाँ जैसे नाबार्ड और एनसीसीएफ राज्य सरकारों के सहयोग से दलहन, तिलहन और कोपरा की भौतिक खरीद करती हैं।
0 किसानों को एमएसपी पर सीधे भुगतान किया जाता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है।
मूल्य अंतर भुगतान योजना (पीडीपीएस):
0 इस योजना के तहत, किसानों को एमएसपी और बाजार मूल्य के बीच का अंतर सीधे उनके बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता है।
0 यह योजना मुख्य रूप से तिलहन के लिए लागू होती है और इसमें फसल की भौतिक खरीद शामिल नहीं होती।
निजी खरीद और भंडारण योजना (आरपीएसएस):
0 यह एक पायलट योजना है जिसमें निजी क्षेत्र के स्टॉकिस्टों को एमएसपी पर फसलों की खरीद की अनुमति दी जाती है।
0 इसका उद्देश्य निजी भागीदारी को बढ़ावा देना और खरीद प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाना है।
बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस):
0 यह योजना तब लागू होती है जब टमाटर, प्याज और आलू जैसी नाशवान फसलों के बाजार मूल्य सामान्य सीजन दरों से 10% या अधिक गिर जाते हैं।
0 केंद्र और राज्य सरकारें नुकसान को साझा करती हैं, और किसानों को निर्धारित मूल्य पर भुगतान किया जाता है।
- योजना का लाभ
0 किसानों को एमएसपी की गारंटी मिलती है, जिससे वे अपनी फसल के सही मूल्य के लिए आश्वस्त रहते हैं।
0 सरकार किसानों से सीधे खरीदारी करके उनका आर्थिक संरक्षण करती है।
0 यदि बाजार मूल्य गिरता है, तो किसानों को मूल्य अंतर का भुगतान किया जाता है।
0 इससे किसानों को बाजार की अस्थिरता से बचाव मिलता है।
0 तिलहन और दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिलती है, जिससे भारत को खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
- पात्रता और आवेदन
0 कोई भी किसान इस योजना का लाभ उठा सकता है।
0 किसानों को अपनी फसल मंडी में बेचनी होगी और एमएसपी से कम मूल्य मिलने की स्थिति में सरकार उनकी भरपाई करेगी।
0 किसान को पीएम-आशा और अन्य सरकारी योजनाओं से पंजीकृत होना चाहिए ताकि वह सीधे बैंक खाते में भुगतान प्राप्त कर सके।
- हालिया अपडेट्स
0 सरकार ने 2025-26 तक पीएम-आशा योजना को जारी रखने की मंजूरी दी है।
0 2024-25 मौसम के लिए तुअर, उड़द और मसूर की 100% खरीद सुनिश्चित की गई है।
0 कुल रुपये 35,000 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
0 राज्यों के लिए तुअर की खरीद का लक्ष्य 13.22 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है।

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