Krishi Chaupal

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

Jul 26, 2025
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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) 1 जुलाई 2015 को शुरू की थी। इसका उद्देश्य पूरे भारत में कृषि में सिंचाई कवरेज और जल दक्षता में सुधार करना है। इस योजना का उद्देश्य ‘हर खेत को पानी’ प्राप्त करना और ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के माध्यम से जल-उपयोग दक्षता में सुधार करना है। इसमें पांच सालों में (2015-16 से 2019-20) तक 50 हजार करोड़ रुपये की राशि खर्च करने का प्रावधान किया गया था। योजना के प्रारंभिक वित्त वर्ष के लिए 5300 करोड़ का आवंटित किए गए थे। हमारे देश में कुल 14.2 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से 65 प्रतिशत में सिंचाई सुविधा नहीं है। इस लिहाज से इस योजना का महत्व और बढ़ जाता है।

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योजना के मुख्य बिन्दु

  • देश में सारी कृषि भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचाना।
  • पानी का सही प्रयोग कर बर्बादी को रोकना।
  • पानी का कम प्रयोग कर अधिक उत्पादन प्राप्त करना।
  • छोटे और सीमांत किसानों को सिंचाई सुविधा से जोड़ना।
  • जल संचयन संरचनाओं का विकास कर जल आपूर्ति में वृद्धि करना।
  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल संचयन के लिए प्रयास करना।

योजना का उद्देश्य

पीएमकेएसवाई का मुख्य उद्देश्य किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधाएँ प्रदान कर कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देना है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:-

  • ‘हर खेत को पानी’ सिद्धांत के तहत सभी कृषि भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुँचाना।
  • जल संसाधनों का कुशल उपयोग कर जल की बबार्दी को रोकना।
  • ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देकर जल संरक्षण सुनिश्चित करना।
  • सिंचाई अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण करना ताकि जल वितरण प्रणाली प्रभावी रूप से कार्य करे।
  • नदी जोड़ो परियोजना एवं जल संचयन संरचनाओं का विकास कर जल आपूर्ति में वृद्धि करना।

योजना के घटक

पीएमकेएसवाई के अंतर्गत चार प्रमुख घटक शामिल हैं:-

(1) त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP – Accelerated Irrigation Benefits Programme)

  • इस घटक का उद्देश्य लंबित बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करना है।
  • नहरों, जलाशयों और बैराज जैसी परियोजनाओं का निर्माण और पुनर्वास किया जाता है।

(2) हर खेत को पानी (Har Khet Ko Pani)

  • छोटे और सीमांत किसानों तक सिंचाई सुविधाएँ पहुँचाना।
  • लघु जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण करना।
  • खेत तालाब, चेक डैम, जल पुनर्भरण संरचनाओं को बढ़ावा देना।

(3) जल संचय एवं जल प्रबंधन (Watershed Development)

  • जल संरक्षण, पुनर्भरण और भूजल स्तर में सुधार हेतु कार्य करना।
  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल संचयन के लिए प्रयास करना।
  • प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर भूमि उपजाऊ बनाना।

(4) प्रति बूंद अधिक फसल (Per Drop More Crop)

  • ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को प्रोत्साहित करना।
  • माइक्रो-इरिगेशन प्रणाली अपनाने के लिए किसानों को सब्सिडी देना।
  • कम जल उपयोग में अधिक उत्पादन सुनिश्चित करना।

योजना के लाभ

  • जल की बचत: आधुनिक सिंचाई प्रणालियों के उपयोग से पानी की बबार्दी कम होती है।
  • कृषि उत्पादन में वृद्धि: सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से फसल उत्पादकता बढ़ती है।
  • पर्यावरण संरक्षण: जल पुनर्भरण और संचय से भूजल स्तर में सुधार होता है।
  • किसानों की आय में वृद्धि: उच्च उत्पादन और लागत में कमी से किसानों की आय बढ़ती है।
  • सूखा प्रवण क्षेत्रों में राहत: सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ती है।

योजना के तहत वित्त पोषण एवं बजट

  • पीएमकेएसवाई केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त वित्त पोषण से संचालित होती है।
  • इसमें केंद्र सरकार 75 प्रतिशत और राज्य सरकार 25 प्रतिशत योगदान देती है।
  • उत्तर-पूर्वी राज्यों और हिमालयी क्षेत्रों में 90 प्रतिशत केंद्र और 10 प्रतिशत राज्य सरकार योगदान करती है।
  • माइक्रो-इरिगेशन योजना के लिए केंद्र सरकार 55 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान करती है।

कौन पात्र हैं?

  • सभी प्रकार के किसान, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसान।
  • किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) एवं सहकारी समितियाँ।
  • राज्य सरकारें एवं स्थानीय निकाय इस योजना के तहत सिंचाई संरचनाओं के विकास में भाग ले सकते हैं।

योजना का लाभ कैसे प्राप्त करें?

  • किसान राज्य कृषि विभाग या कृषि अधिकारी से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं।
  • पीएमकेएसवाई पोर्टल (pmksy.gov.in) पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
  • बैंक एवं वित्तीय संस्थाएँ माइक्रो-इरिगेशन प्रणाली के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं।

योजना की वर्तमान स्थिति और प्रभाव

  • अब तक लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई से जोड़ा गया है।
  • माइक्रो-इरिगेशन तकनीक अपनाने वाले किसानों की संख्या में वृद्धि हुई है।
  • कृषि में जल प्रबंधन की नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है।

योजना से संबंधित चुनौतियाँ

  • किसानों में जागरूकता की कमी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी।
  • जल प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी।
  • राज्य सरकारों द्वारा धीमी क्रियान्वयन प्रक्रिया।
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