Krishi Chaupal

कृषि विस्तार पर उप-मिशन

कृषि विस्तार पर उप-मिशन

Jul 26, 2025
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वर्ष 2014 से लागू की गयी कृषि विस्तार पर उप-मिशन (एसएमएई) राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण उप-मिशन है, जिसका उद्देश्य किसानों तक नवीनतम कृषि तकनीक, जानकारी, और सेवाओं को पहुँचाना है। यह मिशन कृषि उत्पादन को बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने, और कृषि व्यवसाय को लाभकारी बनाने में सहायता करता है। इसके माध्यम से न केवल उन्नत तकनीकों का प्रसार हो रहा है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनने का भी अवसर मिल रहा है।

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  • योजना का उद्देश्य

    0 तकनीकी जानकारी का प्रसार: नवीनतम कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, फसल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, और जल प्रबंधन की जानकारी किसानों तक पहुँचाना।
    0 प्रशिक्षण कार्यक्रम: किसानों को नई तकनीकों और कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण प्रदान करना।
    0 उपकरण और संसाधन उपलब्धता: किसानों को उन्नत कृषि यंत्र, बीज, खाद, और अन्य संसाधन उपलब्ध कराना।
    0 फसल सुरक्षा: फसलों को रोग और कीटों से बचाने के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण।
    0 जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता: किसानों को बदलते मौसम के अनुसार खेती की योजना बनाने में मदद करना।
    0 महिला किसानों का सशक्तिकरण: महिला किसानों को भी समान अवसर और प्रशिक्षण प्रदान करना।

  • मुख्य घटक

    एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी:
    0 प्रत्येक जिले में आत्मा की स्थापना की गई है जो किसानों को कृषि तकनीक की जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करता है।
    0 किसान गोष्ठी, प्रशिक्षण कार्यक्रम, और फील्ड डेमो का आयोजन करता है।
    फार्म स्कूल:
    0 फार्म स्कूल के माध्यम से उन्नत किसानों को मॉडल किसान के रूप में चयनित किया जाता है, जो अपने खेत में अन्य किसानों को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण देते हैं।
    किसान सूचना और सलाह केंद्र:
    0 किसान किसी भी कृषि संबंधी समस्या का समाधान फोन कॉल के माध्यम से पा सकते हैं।
    0 ये सेवाएं मुफ्त हैं और स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध हैं।
    इलेक्ट्रॉनिक कृषि मंच:
    0 किसानों को डिजिटल माध्यम से बाजार मूल्य, मौसम की जानकारी, फसल प्रबंधन, और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाती है।
    कृषि ज्ञान केंद्र:
    0 इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को सीधी तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाता है।

  • वित्त पोषण

    0 केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 का अनुपात होता है, जबकि पहाड़ी राज्यों और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 है।
    0 अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, और महिला किसानों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

  • योजना के लाभ

    0 किसानों को समय पर तकनीकी जानकारी मिलती है जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है।
    0 मौसम परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति जागरूकता से फसल नुकसान कम होता है।
    0 किसान नई तकनीकों का प्रयोग कर कम लागत में अधिक उत्पादन कर पाते हैं।
    0 किसानों को बाजार की जानकारी प्राप्त होती है जिससे वे उचित मूल्य पर अपनी फसल बेच सकते हैं।
    0 ग्रामीण स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है।

  • चुनौतियाँ

    0 सभी किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुँचाना अभी भी एक चुनौती है।
    0 डिजिटल साक्षरता की कमी से ई-प्लेटफॉर्म का पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा।
    0 किसान समूहों का कम जुड़ाव और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सीमित भागीदारी।
    0 सूदूर क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी।

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