Krishi Chaupal

कृषि विपणन के लिए एकीकृत योजना

कृषि विपणन के लिए एकीकृत योजना

Jul 26, 2025
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वर्ष 2014 में शुरू की गयी कृषि विपणन के लिए एकीकृत योजना (आईएसएएम) का उद्देश्य कृषि विपणन के बुनियादी ढांचे में सुधार करना और किसान के स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है। यह एक प्रमुख योजना है जिसे बाजारों तक बेहतर पहुँच की सुविधा प्रदान करके और मूल्य-वर्धित कृषि उत्पादों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। योजना गोदामों के निर्माण या नवीनीकरण, कृषि उपज के भंडारण की क्षमता बढ़ाने के लिए सहायता प्रदान करती है। यह एकीकृत मूल्य श्रृंखलाओं को बढ़ावा देती है, किसानों को प्रसंस्करणकतार्ओं से जोड़ती है और किसान स्तर पर मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करती है। यह योजना व्यक्तियों, किसानों, एफपीओ, सहकारी समितियों और राज्य एजेंसियों सहित लाभार्थियों की एक विस्तृत श्रृंखला तैयार करती है।

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  • योजना के उद्देश्य

  • कृषि विपणन संरचना का विकास: किसानों को उनके उत्पादों को उचित मूल्य पर बेचने के लिए एक सुव्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराना।
  • भंडारण और गोदाम क्षमता का विकास: कृषि उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए गोदाम और कोल्ड स्टोरेज की स्थापना।
  • ग्रामीण कृषि बाजारों का सशक्तिकरण: ग्रामीण स्तर पर छोटे और मध्यम बाजारों का विकास करना।
  • ई-नाम प्लेटफॉर्म का एकीकरण: कृषि उत्पादों को डिजिटल मार्केटप्लेस से जोड़ना, ताकि किसान देशभर में कहीं भी अपने उत्पाद बेच सकें।
  • मूल्य स्थिरता: फसल उत्पादन में अस्थिरता के कारण मूल्य में आने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना।
  • मुख्य घटक

    एग्रीकल्चरल मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर:

  • ग्रामीण बाजारों का आधुनिकीकरण और पुनर्निर्माण।
  • गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, और प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना।
    ई-नाम:
  • एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफार्म जिससे किसान सीधे अपने उत्पाद बेच सकते हैं।
  • अभी तक 1000 से अधिक मंडियों को इससे जोड़ा जा चुका है।
    ग्रामीण गोदाम योजना:
  • किसानों के लिए भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराना ताकि वे अपनी फसल को उचित मूल्य पर बेच सकें।
  • छोटे किसानों के लिए गोदाम निर्माण पर 25% से 33% तक की सब्सिडी।
    विपणन अनुसंधान एवं सूचना नेटवर्क:
  • किसानों को विपणन संबंधी जानकारी जैसे – कीमत, मांग, और बाजार के रुझान की जानकारी उपलब्ध कराना।
    कोल्ड चेन विकास:
  • ताजे उत्पादों, फलों, सब्जियों, और डेयरी उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज की सुविधा।
  • योजना के लाभ

  • किसानों को उचित मूल्य: किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त होता है क्योंकि वे सीधे बाजार से जुड़ सकते हैं।
  • भंडारण की सुविधा: उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की सुविधा उपलब्ध है, जिससे मूल्य में गिरावट का जोखिम कम होता है।
  • बिचौलियों पर नियंत्रण: ई-नाम प्लेटफॉर्म से सीधे किसान और व्यापारी जुड़े रहते हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है।
  • मूल्य स्थिरता: विपणन ढांचे के विकास से कीमतों में स्थिरता आती है।
  • तकनीकी सहायता: किसानों को आॅनलाइन प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्स, और सूचना तंत्र से जोड़ने की सुविधा।
  • चुनौतियाँ

  • प्रशिक्षण की कमी: ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग करने का ज्ञान सीमित है।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी: कई ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी सड़क, भंडारण, और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा अपर्याप्त है।
  • ई-नाम का सीमित विस्तार: सभी मंडियाँ अभी तक इस प्लेटफार्म से नहीं जुड़ी हैं।
  • बिचौलियों का दबाव: कई स्थानों पर बिचौलियों का मजबूत नेटवर्क है, जो किसानों को आॅनलाइन बेचने से रोकता है।
  • सरकारी सहयोग एवं सब्सिडी

  • ग्रामीण गोदाम निर्माण पर 25% से 33% तक की सब्सिडी।
  • कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस के निर्माण पर भी सब्सिडी।
  • ई-नाम से जुड़ने वाले किसानों को प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता।
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