राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति
भारत सरकार द्वारा 2014 में शुरू की गई राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति का उद्देश्य उत्पादकता, स्थिरता और आजीविका को बढ़ाने के लिए खेतों पर पेड़ों, फसलों और पशुधन को एकीकृत करना है। यह कृषि वानिकी को बढ़ावा देकर भोजन, पोषण, ऊर्जा, रोजगार और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करती है, जो वानिकी और कृषि को जोड़ती हुई भूमि-उपयोग प्रणाली है। यह नीति जलवायु परिवर्तन को कम करने, संसाधनों के संरक्षण और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान करने पर भी ध्यान केंद्रित करती है। यह नीति विश्व में अपनी तरह की पहली समर्पित कृषि वानिकी नीति है, जिसका लक्ष्य कृषि भूमि पर पेड़ों की संख्या को बढ़ाना और किसानों को आर्थिक लाभ प्रदान करना है।
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- मुख्य उद्देश्य
कृषि और वानिकी का एकीकरण:
0 किसानों को उनकी कृषि भूमि पर पेड़ उगाने के लिए प्रेरित करना।
0 फसलों के साथ पेड़ों की खेती करके भूमि का अधिकतम उपयोग।
पर्यावरण संरक्षण:
0 मिट्टी का क्षरण रोकना और जल संसाधनों का संरक्षण।
0 जैव विविधता का संरक्षण एवं वायुमंडलीय कार्बन को अवशोषित करना।
आर्थिक लाभ:
0 लकड़ी, फल, चारा, और औषधीय पौधों का उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय में वृद्धि।
0 बाजार तक सीधी पहुँच और मूल्य संवर्धन के अवसर प्रदान करना।
जलवायु अनुकूलन:
0 जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना और अनुकूलन को बढ़ावा देना।
- नीति के मुख्य घटक
प्रोत्साहन एवं समर्थन:
0 किसानों को पेड़ लगाने के लिए आर्थिक सहायता एवं सब्सिडी।
0 दीर्घकालिक वित्तीय योजनाएँ और बैंक से कम ब्याज दर पर ऋण।
शोध एवं विकास:
0 उन्नत किस्मों के पेड़ों का विकास एवं तकनीकी अनुसंधान।
0 जलवायु और क्षेत्र के अनुसार विभिन्न प्रजातियों का चयन।
बाजारीकरण एवं विपणन:
0 किसानों द्वारा उत्पादित लकड़ी, फल, चारा आदि के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था।
0 उचित मूल्य समर्थन और विक्रय के लिए सहकारी समितियाँ।
क्षमता निर्माण:
0 किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करना।
0 आधुनिक कृषि वानिकी तकनीकों का प्रसार।
संविधानिक एवं कानूनी सुधार:
0 पेड़ों की कटाई और विपणन पर राज्य स्तरीय नियमों में सुधार।
0 किसानों को बिना कठिनाई के पेड़ों की कटाई और परिवहन की अनुमति।
- प्रमुख फसलें एवं पेड़
0 फलदार वृक्ष: आम, अमरूद, कटहल, आंवला
0 औषधीय वृक्ष: नीम, अश्वगंधा, तुलसी
0 लकड़ी देने वाले पेड़: सागौन, शीशम, यूकेलिप्टस
0 चारा देने वाले पेड़: सुबबूल, लेक्यूना, बबूल
0 फाइबर देने वाले पेड़: बांस, जूट, केन
- प्रमुख लाभ
0 आर्थिक लाभ: कृषि वानिकी किसानों को लकड़ी, फल, और औषधीय उत्पादों से अतिरिक्त आय प्रदान करती है।
0 पर्यावरण संरक्षण: मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, वायुमंडलीय कार्बन का अवशोषण, और जैव विविधता का संरक्षण।
0 जल संरक्षण: पेड़ जल स्रोतों को संरक्षित करते हैं और भू-जल स्तर को बनाए रखते हैं।
0 मिट्टी का संरक्षण: पेड़ों की जड़ें मिट्टी के कटाव को रोकती हैं।
0 प्राकृतिक आपदाओं से बचाव: कृषि वानिकी प्रणाली प्राकृतिक आपदाओं, जैसे- बाढ़ और सूखे से निपटने में सक्षम है।
- चुनौतियाँ
0 जागरूकता की कमी: ग्रामीण क्षेत्रों में इस नीति के बारे में जागरूकता कम है।
0 विपणन की समस्या: उत्पादों के उचित मूल्य और बाजार तक पहुँच की कमी।
0 कानूनी बाधाएँ: कुछ राज्यों में पेड़ों की कटाई और परिवहन पर सख्त नियम हैं।
0 भूमि की उपलब्धता: सीमित भूमि वाले किसानों के लिए अधिक पेड़ लगाना संभव नहीं होता।
- सरकारी प्रयास
0 राष्ट्रीय कृषि वानिकी मिशन के अंतर्गत विभिन्न योजनाएँ चल रही हैं।
0 राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर विशेष योजनाएँ चला रही हैं, जैसे ‘हरियाली मिशन’ और ‘ग्रीन इंडिया मिशन’।
0 नाबार्ड के सहयोग से किसानों को आसान ऋण सुविधा प्रदान की जाती है।

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