“विकसित भारत जी‑राम जी योजना” का राष्ट्रीय शुभारंभ
02 जून 2026 | पीआईबी।
आंध्र प्रदेश के तिरुपति ज़िले के मुक्कावरिपल्ली गाँव से “विकसित भारत– जी राम जी योजना” का केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधिवत राष्ट्रीय शुभारंभ किया। प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और कमलेश पासवान तथा सांसद‑विधायक और जनसमुदाय इस मौके के गवाह बने।
भगवान वेंकटेश्वर के चरणों में नमन से शुरू वीबी- जी राम जी
शिवराज सिंह चौहान ने अपना संबोधन “नमः वेंकटेश्वराय” और “गोविंदा, गोविंदा” के जयकारों के साथ शुरू करते हुए कहा कि इस पावन धरती से विकसित भारत जी‑राम जी योजना लागू होना गरीबों और मजदूरों के लिए भगवान की कृपा की वर्षा जैसा है। उन्होंने प्रार्थना की कि देश में कोई भी गरीब मजदूर बिना काम के न रहे, हर हाथ को काम और हर पेट को रोटी मिले।
मनरेगा से आगे वीबी- जी राम जी– 100 से 125 दिन रोजगार की छलांग
शिवराज सिंह चौहान ने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के समय शुरू हुई मनरेगा में सिर्फ 100 दिन रोज़गार की गारंटी दी जाती थी। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री मोदी की नई रणनीति के तहत विकसित भारत- जी राम जी योजना में मजदूरों के लिए पूरे 125 दिन तक काम की पक्की गारंटी दी जा रही है। अब लक्ष्य यह है कि कोई हाथ खाली न रहे।
पहले ही साल में 1.51 लाख करोड़ रु. का प्रावधान
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने योजना के वित्तीय पक्ष पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि ”विकसित भारत- जी राम जी योजना” के पहले ही वर्ष में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 95,000 करोड़ रु. से अधिक रहेगी और राज्यों की 40% हिस्सेदारी जोड़कर यह वार्षिक व्यय 1.51 लाख करोड़ रु. के आसपास पहुँचता है। अगले 5 साल में इस योजना के तहत कुल 7.5 लाख करोड़ रु. खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। यह धन देश की 2.86 लाख पंचायतों तक पहुँचकर हर पंचायत को प्रति वर्ष औसतन 2 करोड़ रु. से ज़्यादा की राशि देगा जिससे गाँवों में रोजगार भी बढ़ेगा और स्थायी परिसंपत्तियाँ भी बनेंगी।
रोज़गार की कानूनी गारंटी – 15 दिन में काम, वरना बेरोज़गारी भत्ता
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत- जी राम जी योजना में मजदूरों के अधिकारों को कानूनी ताकत दी गई है। किसी भी मजदूर द्वारा काम माँगने पर 15 दिन के भीतर उसे रोज़गार देना अनिवार्य होगा और यदि निर्धारित समय में काम नहीं दिया गया तो संबंधित मजदूर को बेरोज़गारी भत्ता देना पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब मजदूर के पसीने से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता।
मजदूरी की नई दरें
श्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि अब किसी भी राज्य में मजदूरी 300 रु. से कम नहीं होगी। आंध्र प्रदेश में तो यह दर 312–315 रु. के बीच रखी गई है ताकि मजदूरों को पसीने की पूरी कीमत मिल सके।
गाँव का फैसला गाँव में – ग्राम सभा तय करेगी काम
शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि किस गाँव में कौन‑सा काम होगा, यह दिल्ली या अमरावती से तय नहीं किया जाएगा। काम तय करने का अधिकार ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के पास रहेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गाँव की जनता खुद तय करेगी कि उन्हें आंगनवाड़ी बनानी है, स्कूल, अस्पताल या सड़क चाहिए, खेत‑सड़क बनानी है, एफपीओ के लिए संरचना करनी है, तालाब, जैक डैम, बाँध या प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए कोई सुरक्षा दीवार बनानी है– यह सब निर्णय गाँव में बैठकर ग्राम सभा तय करेगी।
पिछड़ी पंचायतों को अतिरिक्त मदद
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने राज्यों से कहा कि वे अपनी पंचायतों का ग्रेडेशन कर A, B, C श्रेणियों में बाँट सकते हैं और जो पंचायत विकास में पीछे हैं, उन्हें अधिक राशि देकर तेज़ी से काम करवा सकते हैं। इससे इंटीरियर और पिछड़े इलाकों के गाँवों में विकास की रफ्तार बढ़ेगी।
आंध्र प्रदेश के संदर्भ में उन्होंने बताया कि केवल 9 महीने की अवधि के लिए विकसित भारत- जी राम जी योजना के तहत केंद्र से 7,707 करोड़ रु. की विशेष राशि दी जा रही है। राज्य सरकार के हिस्से के साथ यह पैकेज आंध्र प्रदेश को देश में शीर्ष राज्यों में लाएगा।
विकसित भारत –
गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)
VB-G RAM G, मनरेगा का उन्नत (upgraded) और संशोधित स्वरूप है। इसे सरकार ने मनरेगा की जगह लागू किया है। इसका उद्देश्य केवल रोजगार देना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका, आधुनिक प्रबंधन, बेहतर बुनियादी ढांचे और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य के अनुरूप ग्रामीण विकास को गति देना भी है।
प्रमुख उद्देश्य
- ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी प्रदान करना।
- गांवों में स्थायी एवं उपयोगी परिसंपत्तियों (Assets) का निर्माण।
- ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाना
- स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को बढ़ावा देना।
- वर्ष 2047 तक “विकसित भारत” के लक्ष्य में ग्रामीण भारत की भागीदारी सुनिश्चित करना।
मुख्य विशेषताएँ
- पात्र ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 125 दिनों तक मांग-आधारित अकुशल रोजगार की गारंटी।
- मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक खाते (DBT) के माध्यम से।
- कार्य उपलब्ध न होने की स्थिति में नियमों के अनुसार बेरोज़गारी भत्ते का प्रावधान।
- ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका।
- बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग तथा डिजिटल निगरानी जैसी व्यवस्थाओं से पारदर्शिता बढ़ाना।
- जल संरक्षण, वृक्षारोपण, ग्रामीण सड़क, तालाब, सिंचाई एवं अन्य टिकाऊ विकास कार्यों पर विशेष जोर।
किन कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी?
- जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन
- तालाब, पोखर एवं चेक डैम निर्माण
- खेत सुधार एवं सिंचाई सुविधाएँ
- ग्रामीण सड़क एवं संपर्क मार्ग
- वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण
- सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण एवं रखरखाव
संभावित लाभ
- ग्रामीण बेरोज़गारी में कमी।
- किसानों एवं मजदूरों की आय में वृद्धि।
- गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विकास।
- पलायन में कमी।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती।
