हमेशा प्रासंगिक रहेंगे लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल
– रमेश सर्राफ धमोरा। भारत के राजनीतिक इतिहास में सरदार पटेल के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। देश की आजादी के संघर्ष में उन्होंने जितना योगदान दिया उससे ज्यादा योगदान उन्होने स्वतंत्र भारत को एक करने में दिया। पटेल राष्ट्रीय एकता
धनतेरस से प्रारंभ होता है दीपोत्सव
प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। धनतेरस दिवाली के दो दिन पूर्व मनाया जाने वाला त्योहार है। धनतेरस से दिवाली पर्व की शुरुआत हो जाती है। दिवाली पर पांच दिनों तक चलने वाले
वन नेशन-वन इलेक्शन की व्यवस्था में बाधाएं
बृजमोहन पंत। एक देश एक चुनाव के बारे में भारत सरकार की कार्यवाही चल रही है। सुझाव तो अच्छा है लेकिन इसको व्यवहार में लाना कठिन है। फिर भी इस बारे में विकल्प तलाशे जा रहे हैं। लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ
प्राकृतिक खेती के फायदे
प्राकृतिक खेती एक प्रकृति अनुकूल कृषि प्रणाली है जो फसलों, पेड़ों-पौधों और पशुओं को एकीकृत करती है, जिससे जैव विविधता का समन्वित उपयोग होता है। प्राकृतिक खेती अगर प्रभावी ढंग से की जाती है तो कई अन्य लाभ प्रदान करते हुए किसानों की
गढ़वाली थियेटर: यात्रा जारी है!
– सुरेश नौटियाल यहां गढ़वाली नाटकों पर विशेषरूप से बातचीत हो रही है. इसलिए यह स्मरण करना आवश्यक है कि गढ़वाल में नाटकों से पहले परंपरागत मनोरंजन के माध्यमों या साधनों में पांडवनृत्य, लांग, भैलानृत्य, ऋतुनृत्य, चौंफला, झुमेलो, छोपती, तांदीनृत्य, थड्या और स्वांग
गिरवी राज्य उत्तराखंड!
–सुरेश नौटियाल इस वर्ष नौ नवंबर को उत्तराखंड राज्य बने 23 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं. राजनीति के हिसाब से इस छोटी सी अवधि और जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं के हिसाब से इस बड़ी अवधि का लेखा-जोखा आम जनता अपने हिसाब
प्लास्टिक से मुक्ति का मार्ग है क्या?
– सुरेश नौटियाल आज पूरी दुनिया प्लास्टिक के खतरों से परेशान है. संसार भर के पर्यावरण कार्यकर्त्ता, वैज्ञानिक, प्रशासक और आम लोग कोशिश में हैं कि किस प्रकार से इस समस्या से मुक्ति पायी जा सके. इस बीच दुनियाभर में अनेक कंपनियों ने
वृक्ष-खेती के संरक्षण में मल्च है अत्यंत महत्वपूर्ण
– सुरेश नौटियाल भारत में पारंपरिक खेतीबाड़ी में मल्च अर्थात सूखे खर-पतवार का महत्व अधिक नहीं है. जब धान की फसल काटने के बाद लाखों-लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि में पराली (धान की सूखी पतवार) जलाई जाती है तब हमारा यह अज्ञान सामने आता
कहां गये धारे, नौले और गधेरे?
सुरेश नौटियाल। अपनी उम्र साठ पार है और बचपन उत्तराखंड के पहाड़ी गांव में बीता। पहले पढ़ाई और अब कमाई की मजबूरी के चलते शहर दिल्ली में बसासत है। बचपन से लेकर अब तक गांव, पहाड़ और उत्तराखंड से बराबर संवाद, संपर्क और
पर्यटन का कीर्तिमान बनेगी अयोध्या
डॉ. दिलीप अग्निहोत्री । उत्तर प्रदेश पर्यटन की दृष्टि से बहुत समृद्ध रहा है। इसमें आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक आदि सभी प्रकार के पर्यटन शामिल हैं। पहली बार योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रकार के पर्यटन को प्रदेश की अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया है। प्रदेश

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