नीतीश ने करायी जग हंसाई
– अशोक त्रिपाठी। सुशासन कुमार के नाम से विख्यात रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गत 7 नवम्बर को पटना की विधानसभा में जातीय जनगणना पर भाषण के दौरान इतनी भद्दी बात कह दी जिससे उनकी तो जगहंसाई हो ही रही है,
आयुर्वेद के जन्मदाता महर्षि धनवंतरि
– मोहिता स्वामी। कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को धनतेरस के साथ ही भगवान धनवंतरि की जयंती भी मनायी जाती है। धनवंतरि वैद्य को आयुर्वेद का जन्मदाता माना जाता है। हमारे धार्मिक आख्यानों के अनुसार देवों और दैत्यों ने मिलकर जब समुद्र मंथन किया
कसमसाती धरती और हमारी लापरवाही
– मनोज कुमार अग्रवाल। पिछले कुछ समय से दुनिया के कई हिस्सों में आ रहे भूकम्प संकेत दे रहे हैं कि धरती की बेचैनी कहीं न कहीं बहुत बढ़ गई है और यह आने वाली विनाशकारी आशंका की सूचना दे रही है। हाल
उल्लू व कछुआ से नहीं पुरुषार्थ से मिलती है लक्ष्मी
– अशोक त्रिपाठी। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि लक्ष्मी उद्यमी पुरुष को ही मिलती है। प्रगति और संपन्नता का एक मात्र साधन उद्यम अर्थात पुरुषार्थ है। भाग्य पर भरोसा करना अथवा तंत्र-मंत्र पर विश्वास करने वालों को लक्ष्मी त्याग कर पुरुषार्थ
शिक्षा मंत्रालय का सराहनीय निर्णय
– मोहिता स्वामी। शिक्षा को व्यावहारिक बनाना नरेन्द्र मोदी सरकार का लक्ष्य दिखता है। इसी के चलते नयी शिक्षा नीति बनायी गयी। नयी शिक्षा नीति को कार्यान्वित करने के लिए शिक्षा प्रणाली में भी परिवर्तन करना जरूरी होगा। इसी के चलते केन्द्रीय स्कूल
हमेशा प्रासंगिक रहेंगे लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल
– रमेश सर्राफ धमोरा। भारत के राजनीतिक इतिहास में सरदार पटेल के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। देश की आजादी के संघर्ष में उन्होंने जितना योगदान दिया उससे ज्यादा योगदान उन्होने स्वतंत्र भारत को एक करने में दिया। पटेल राष्ट्रीय एकता
धनतेरस से प्रारंभ होता है दीपोत्सव
प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। धनतेरस दिवाली के दो दिन पूर्व मनाया जाने वाला त्योहार है। धनतेरस से दिवाली पर्व की शुरुआत हो जाती है। दिवाली पर पांच दिनों तक चलने वाले
वन नेशन-वन इलेक्शन की व्यवस्था में बाधाएं
बृजमोहन पंत। एक देश एक चुनाव के बारे में भारत सरकार की कार्यवाही चल रही है। सुझाव तो अच्छा है लेकिन इसको व्यवहार में लाना कठिन है। फिर भी इस बारे में विकल्प तलाशे जा रहे हैं। लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ
प्राकृतिक खेती के फायदे
प्राकृतिक खेती एक प्रकृति अनुकूल कृषि प्रणाली है जो फसलों, पेड़ों-पौधों और पशुओं को एकीकृत करती है, जिससे जैव विविधता का समन्वित उपयोग होता है। प्राकृतिक खेती अगर प्रभावी ढंग से की जाती है तो कई अन्य लाभ प्रदान करते हुए किसानों की
गढ़वाली थियेटर: यात्रा जारी है!
– सुरेश नौटियाल यहां गढ़वाली नाटकों पर विशेषरूप से बातचीत हो रही है. इसलिए यह स्मरण करना आवश्यक है कि गढ़वाल में नाटकों से पहले परंपरागत मनोरंजन के माध्यमों या साधनों में पांडवनृत्य, लांग, भैलानृत्य, ऋतुनृत्य, चौंफला, झुमेलो, छोपती, तांदीनृत्य, थड्या और स्वांग

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