गिरवी राज्य उत्तराखंड!
–सुरेश नौटियाल इस वर्ष नौ नवंबर को उत्तराखंड राज्य बने 23 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं. राजनीति के हिसाब से इस छोटी सी अवधि और जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं के हिसाब से इस बड़ी अवधि का लेखा-जोखा आम जनता अपने हिसाब
प्लास्टिक से मुक्ति का मार्ग है क्या?
– सुरेश नौटियाल आज पूरी दुनिया प्लास्टिक के खतरों से परेशान है. संसार भर के पर्यावरण कार्यकर्त्ता, वैज्ञानिक, प्रशासक और आम लोग कोशिश में हैं कि किस प्रकार से इस समस्या से मुक्ति पायी जा सके. इस बीच दुनियाभर में अनेक कंपनियों ने
वृक्ष-खेती के संरक्षण में मल्च है अत्यंत महत्वपूर्ण
– सुरेश नौटियाल भारत में पारंपरिक खेतीबाड़ी में मल्च अर्थात सूखे खर-पतवार का महत्व अधिक नहीं है. जब धान की फसल काटने के बाद लाखों-लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि में पराली (धान की सूखी पतवार) जलाई जाती है तब हमारा यह अज्ञान सामने आता
कहां गये धारे, नौले और गधेरे?
सुरेश नौटियाल। अपनी उम्र साठ पार है और बचपन उत्तराखंड के पहाड़ी गांव में बीता। पहले पढ़ाई और अब कमाई की मजबूरी के चलते शहर दिल्ली में बसासत है। बचपन से लेकर अब तक गांव, पहाड़ और उत्तराखंड से बराबर संवाद, संपर्क और
पर्यटन का कीर्तिमान बनेगी अयोध्या
डॉ. दिलीप अग्निहोत्री । उत्तर प्रदेश पर्यटन की दृष्टि से बहुत समृद्ध रहा है। इसमें आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक आदि सभी प्रकार के पर्यटन शामिल हैं। पहली बार योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रकार के पर्यटन को प्रदेश की अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया है। प्रदेश
पूर्वजों के प्रति सम्मान का पर्व है पितृपक्ष
पं. आर.एस. द्विवेदी । पितृपक्ष पूर्वजों को समर्पित है। माना जाता है कि पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा अपने परिजनों से मिलने आती है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। पंचांग के अनुसार पितृपक्ष की शुरुआत भाद्रपद माह की
बहुत गुणकारी है गूलर
पीपल, बरगद, पाकड़, गूलर और आम – ये पांच तरह के पेड़ धार्मिक रूप से बेहद महत्व रखते हैं क्योंकि ये अन्य पेड़ों की तुलना में अधिक आॅक्सीजन उत्सर्जन करते हैं। ये पेड़ मनुष्य के जीवन के लिये विभिन्न रूप से लाभकारी हैं।
कई सारी विशेषताओं से भरपूर है मदार
अकवन को हिंदी में मदार कहते हैं और इसे एक जहरीले पौधे के रूप में जाना जाता है। मदार का पौधा किसी जगह पर उगाया नहीं जाता है। यह पौधा अपने आप ही कहीं पर भी उग जाता है, हालांकि यह पौधा अपने
बकरियों में होने वाली मुख्य बीमारियां
बीमारियों की वजह से किसान को पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। पशुओं में होने वाली बीमारियों के रोकथाम व उचित इलाज से इस आर्थिक नुकसान को कम किया जा सकता है। पशुओं में रोग प्रबंधन कर
उत्तराखंड के पहाड़ों में मानव और बाघों के बीच संघर्ष चरम पर
बाघ के खौफ ने पहाड़ी गांवों में सहजता वाला जनजीवन छीन लिया है। शायद ही कोई दिन गुजरता हो, जब लोगों पर बाघों के हमले की खबर न आती हो। हाल में पौड़ी जिले में रिखणीखाल और धूमाकोट तहसीलों के कम से कम

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